अनीता गुलेरिया
दिल्ली :नार्थ वेस्ट दिल्ली रानी बाग इलाके में सरस्वती विहार के रहने वाले सुरेंद्र अग्रवाल के घर के बाहर खड़ी स्कूटी को हेड-कांस्टेबल रघुवीर और उसके साथ सादा कपड़े वाले आदमी ने स्कूटी को वहां से उठा लिया और उनके गार्ड से ₹200 थाने में आकर देने को कहा ! तब सुरेंद्र का छोटा नाबालिक लड़का जिसका नाम गौरव गुप्ता,उम्र 17 साल थाने में स्कूटी छुड़ाने के लिए गया सारे कागजात दिखाने के बावजूद, उससे ₹1000 की मांग की गई !पैसे ना देने के कारण पुलिस वालों ने उस नाबालिक बच्चे की चांटो और घूसों से जमकर पिटाई कर दी ! थोड़ी देर बाद जब उसका बड़ा भाई तुषार गुप्ता थाने पहुंचा छोटे भाई को रोता हुआ देखकर उसने पुलिस वालों से पिटाई करने का कारण पूछा तो पुलिस वालों ने जो कि पुरी तरह से नशे में थे, तुषार को रीडर रूम में ले जाकर उसका दीवार में जोर से सर पटकते हुए उसकी पीठ में सऊया अंदर तक अति दर्दनाक तरीके से डाल कर घुसा दिया और पैर की एक उंगली को ब्लेड से बुरे तरीके से काट दिया ! तुषार के अनुसार उसकी बहुत बुरी तरह से जमकर पिटाई करते हुए पुलिस वालों ने उसे उसकी डंडे से भी खूब पिटाई की,जिस के निशान उसकी छाती बाजू हर जगह पर दिखाई दे रहे हैं ! काफी देर बीतने पर जब उनके माता-पिता थाने पहुंचे और बच्चों की बुरी हालत देखकर पुलिस वालों से पिटाई की वजह पूछी तो तुषार की मां को एक पुलिस वाले ने हाथ पकडकर जोर से खींचते हुए काफी अश्लील बातें करते हुए उसके साथ अभद्र व्यवहार किया ! सुरेंद्र गुप्ता से कहा तेरे इन दोनों लड़कों को ड्रग्स के केस में बंद करवा देंगे !उसकी और उसके दोनों बेटों की को दोबारा फिर से रीडर रूम में ले जाकर तीनों की बेरहमी से पिटाई की गई ! तुषार के चाचा को जब इस बात का पता चला तो वह थाने पहुंचे,तो पुलिस वालों ने थाने के गेट को अंदर से चैन लगाकर बंद कर दिया ! तीन बार पीसीआर कॉल करने पर जब पीसीआर की गाड़ी आई तो थाने वालों ने उनको को भी अंदर नहीं आने दिया! थाने के एसएचओ को जब इस बात की इतला दी गई तब भी उन्होंने कोई कार्यवाही ना करते हुए ना तो पीड़ितों का मेडिकल होने दिया और ना ही कोई लिखित शिकायत दर्ज की !अगले दिन आलाधिकारियों को इस बात की शिकायत मिलते ही तुरंत कार्रवाई करते हुए आला अधिकारी द्वारा छह पुलिसकर्मी सहित एसएचओ को भी लाइन हाजिर कर दिया ! इस तरह कुल मिलाकर रानी बाग थाने के अंदर रात के समय किसी महिला को जबरदस्ती थाने के अंदर बंदी बनाने जैसे घोर-अपराध के साथ-साथ बिना जुर्म के लिखित मामले को दर्ज किए बिना बंदी बनाकर पिटाई करना संविधान के तहत बने कानूनों की सीधे-सीधे उल्लंघना व सरेआम लोकतंत्र की हत्या नहीं तो और क्या है ........? वह दिन कब आएगा जब पुलिस आम नागरिक से पूर्णत: रूप से सहयोग करते हुए (सहयोगी पुलिस) का रवैया अपनाएगी....?


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