गांवों में कच्ची शराब का रैकेट सक्रिय, जहरीले रसायन के मिश्रण से हो रही मौत
ए. आर. उस्मानी
गोण्डा। कच्ची शराब के कारोबार ने मोतीगंज थाने की कहोबा चौकी क्षेत्र में पैर पसार लिया है। मौत का यह खतरनाक कारोबार पुलिस के संरक्षण में फलफूल रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात तो यह है कि चौकी इंचार्ज की नाक के नीचे ही यह कारोबार खुलेआम फलफूल रहा है।
बताते हैं कि कच्ची शराब में जहरीले रसायन का धड़ल्ले से प्रयोग किया जा रहा है। शराब से हुई मौतों के बाद प्रदेश भर में बड़े पैमाने पर छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन कहोबा क्षेत्र इससे अछूता है। यहां सिर्फ छापामारी के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है।
प्रदेश के कुशीनगर व सहारनपुर में अवैध कच्ची जहरीली शराब पीने से हुई मौतों के बाद सरकार हरकत में आई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे गंभीरता से लेते हुए बड़े पैमाने पर छापेमारी और धरपकड़ अभियान चलाकर इस अवैध कारोबार को पूर्ण रूप से बंद कराने का फरमान जारी किया। इसके बाद सूबे के पुलिस प्रमुख (डीजीपी) भी तेवर में आ गए।
उन्होंने जहरीली शराब के विरूद्ध बड़े स्तर पर अभियान चलाकर अवैध कारोबार पूरी तरह बंद कराने तथा इस धंधे में लगे लोगों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई करने का फरमान जारी किया। डीजीपी के आदेश के बाद सूबे की पुलिस हरकत में आ गई और ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू हो गई।
गोण्डा जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में छापेमारी के दौरान हजारों लीटर अवैध कच्ची शराब, लहन व शराब बनाने के उपकरण नष्ट किए गए तथा सौ से अधिक लोगों के विरूद्ध कार्रवाई की गई। वहीं जिले के मोतीगंज थाना क्षेत्र की कहोबा चौकी इस बड़े अभियान से पूरी तरह अछूती है।
सूत्रों के अनुसार कहोबा चौकी क्षेत्र के नेवादा, खटिकन पुरवा, सैदवापुर, दनौवा, बभनी, चमारन पुरवा, छाछपारा मतवल्ली, खखरइया, कस्टुवा, हड़हवा, गढ़ी, फरेंदा व भंवरियापारा आदि गांवों में खुलेआम मौत का कारोबार हो रहा है। इन गांवों में छापेमारी के नाम पर अब तक महज खानापूर्ति ही की गई, जबकि सूत्र बताते हैं कि यहां बड़े पैमाने पर कच्ची जहरीली शराब का कारोबार होता है।
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| आवास चौकी इंचार्ज |
चौकी इंचार्ज के आवास के पास ही धधक रहीं भट्ठियां
बताया जाता है कि कहोबा चौकी से पश्चिम मनकापुर-दर्जीकुआं रोड पर एक मकान में चौकी इंचार्ज लाल साहब सिंह रहते हैं, जिसके 50 मीटर के दायरे में ही शराब की दो-तीन भट्ठियां धधकती हैं।
हद तो यह है कि उनकी नाक के नीचे ही शराब की भट्ठियां धधकती हैं लेकिन वे इस जानलेवा कारोबार से अंजान बन रहे हैं। शाम होते ही नशेड़ी सड़क के किनारे लुढ़कने लगते हैं। गन्ने के खेत इन कारोबारियों के सुरक्षित ठिकाने बताए जाते हैं। सूत्र बताते हैं कि पुलिस सब कुछ जानते हुए भी इन शराब कारोबारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करती है।



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