मै मिट्टी में पला बड़ा ,
मै मिट्टी का जन्मा हूं ।
मै मर कर भी मिट्टी में जाऊं
इसलिए मुझे हैं मिट्टी प्यारी।
यह मिट्टी मेरी मां हैं ,
यह मिट्टी ही मेरी गोदी।
इस मिट्टी में मैं सोता हूं ,
इस मिट्टी में मै रोता हूं ।
धूल चटाऊ तो मिट्टी का
खून बहाऊ तो मिट्टी में ,
करूं प्राण न्यौछावर मिट्टी पर
इस लिए पूजता हूं मिट्टी को ।
यह मिट्टी वहीं धरा हैं
जहां पर लक्ष्मीबाई हुई।
और यहां तात्या ,सुखदेव का
वीर शिवाजी की गाथां का
डंका यहां पर बजता है ।
और चन्द आतंकी आते है,
मिट्टी में मुझे मिलाने को,
कसम मुझे हैं धरती मां की
और तिरंगे की अपने ।
मिट्टी उन्हें खिलाउगा ,
मिट्टी मै उन्हें बनाउगा ।
और जरूरत अगर पड़ी तो
पूरे" पाक" को मिट्टी की कब्र बनाउगा ।
वंदे मातरम् जय हिंद जय भारत ।।"
रेशमा त्रिपाठी युवा साहित्यकार
प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश


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