अखिलेश्वर तिवारी
जनपद बलरामपुर जिला मुख्यालय स्थित एमएलके पीजी कॉलेज एवं स्पिक मैके के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को महाविद्यालय सभागार में ओडिशी नृत्यांगना पद्मश्री विदुषी गीता महलिक का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम के दौरान उड़िया भाषा में प्रस्तुत मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की कथा पर आधारित नृत्य देखकर सभी भाव विभोर हो गए।
8 अगस्त को कार्यक्रम का शुभारंभ पद्मश्री विदुषी गीता महलिक, प्राचार्य प्रो0 जे पी पाण्डेय, मुख्य नियंता प्रो0 वीणा सिंह, संयोजक प्रो0 रेखा विश्वकर्मा, पूर्व सांस्कृतिक निदेशक डॉ अनामिका सिंह, स्पिक मैके देवीपाटन व बस्ती मंडल के ग्रुप कोऑर्डिनेटर लेफ्टिनेंट डॉ देवेंद्र कुमार चौहान ने दीप प्रज्वलित एवं मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करके किया। महाविद्यालय स्पिक मैके कोऑर्डिनेटर प्रो0 रेखा विश्वकर्मा मैम ने सभी का स्वागत किया।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो0 जे पी पाण्डेय ने पद्मश्री विदुषी गीता महलिक, गायक हरि नारायण दास,मृदंग वादक प्रशांत मंगराज व वायलिन वादक अजहर शकील सहित सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए बताया कि स्पिक मैके युवाओं में भारतीय शास्त्रीय संगीत व संस्कृति के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए सदैव प्रयासरत है। पद्मश्री एवं संगीत नाटक अकादमी अवार्डी विदुषी गीता महलिक ने उपस्थित छात्र-छात्राओं को बताया कि ओडिसी, भारतीय शास्त्रीय नृत्यों में से एक है, जो ओडिशा राज्य में उत्पन्न हुआ। यह नृत्य शैली मंदिरों और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी हुई है और इसमें नृत्त (शरीर की अमूर्त भंगिमाएं) और नृत्य (भावों को व्यक्त करने के लिए चेहरे के भाव, हाथों के अभिनय और शरीर की गतिविधियों का उपयोग) दोनों शामिल हैं। ओडिसी नृत्य धार्मिक मान्यताओं, विशेष रूप से वैष्णववाद और भगवान जगन्नाथ से जुड़ा हुआ है। यह आध्यात्मिक विचारों और कहानियों को व्यक्त करता है। उन्होंने कहा कि ओडिसी नृत्य में दो मुख्य मुद्राएं हैं: चौका, जो एक वर्गाकार मुद्रा है और त्रिभंग, जो एक स्त्री-सुलभ मुद्रा है, जिसमें शरीर गर्दन, मध्य और घुटनों पर मुड़ा हुआ होता है। कार्यक्रम के दौरान मंगलाचरण से ओडिशी नृत्य का शुभारंभ करने के साथ ही भूमि प्रणाम, त्रिखंडी प्रणाम व राग बसंत पल्लवी पर आधारित अभिनय मुद्रा की प्रस्तुति दी। मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम की कथा पर आधारित रामायण का वर्णन अपनी नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत कर सभी को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम का संचालन वालेंटियर हर्षिता श्रीवास्तव ने किया। कार्यक्रम के समापन पर कलाकारों को महाविद्यालय की ओर से बुके,अंगवस्त्र व स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर प्रो0 एस पी मिश्र,प्रो0 मोहिउद्दीन अंसारी, प्रो0 विमल वर्मा,डॉ दिनेश मौर्य,डॉ तारिक कबीर, डॉ राजीव रंजन,डॉ आलोक शुक्ल, डॉ प्रखर त्रिपाठी, डॉ सद्गुरु प्रकाश, डॉ एस के त्रिपाठी,डॉ सुनील शुक्ल, डॉ शिव महेन्द्र, डॉ कृतिका तिवारी,डॉ अर्चना, डॉ शकुंतला, डॉ पी एन,डॉ के पी मिश्र,डॉ दिनेश तिवारी, डॉ के के सिंह,डॉ पंकज श्रीवास्तव, डॉ मोहम्मद अकमल, डॉ अनुज सिंह, डॉ पंकज गुप्त सहित सभी शिक्षक व छात्र-छात्राएं मौजूद रहीं।
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