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खाद्यान्न माफियाओं से हैं धानेपुर थानाध्यक्ष के याराना सम्बंध !






खाद्यान्न कालाबाजारी की सूचना डायल 100 पर देना पड़ा महंगा
खाद्यान्न माफियाओं से साठगांठ कर थानाध्यक्ष ने लिखी बेलगामी की स्क्रिप्ट
ए. आर. उस्मानी
गोण्डा। 10 मई की रात थाना धानेपुर में एक प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई गई, जिसके वादी राजेंद्र प्रसाद ने तीन लोगों पर आरोप लगाया कि फर्जी पूर्ति निरीक्षक बनकर उचित दर विक्रेता राजेन्द्र प्रसाद को जान से मार डालने की धमकी देकर अवैध रूप से 25 हजार रुपए की फिरौती मांगी। 


अब चलते हैं सच की ओर। इन दिनों जिले में  खाद्यान्न घोटाला चरम पर रहा है। बीते 10 मई की शाम करीब साढ़े आठ बजे होंगे। श्रीनगर बाबागंज के सहकारी गल्ला व्यापारी राजेन्द्र प्रसाद की दुकान से गल्ले का माल चोरी से बेचने के लिए विष्णु गुप्ता की दुकान पर ले जाया जा रहा था, जिसे ग्रामीणों ने पकड़ लिया। लोगों की भीड़ जमा हुई तो अपनी बेटी के ससुराल पहुंचे पत्रकार दिनेश पांडेय भी मौके पर पहुंचे और लोगों का बयान लेने लगे।
वीडियो 


 तभी मौके पर डायल 100 टीम के साथ एसओ धानेपुर अतुल चतुर्वेदी भी अपने दल बल के  साथ पहुंच गए। एसओ चतुर्वेदी ने पत्रकार को पकड़ कर गालियां देते हुए मारा पीटा व पुलिस जीप में डाल दिया तथा शिकायतकर्ता को मौके पर बुलाया। बताया जाता है कि जब शिकायतकर्ता मौके पर पहुंचा तो व उनके साथ मोटर साइकिल पर बैठे व्यक्ति को पुलिस ने पकड़ लिया और फिर शुरू हुआ पुलिस का खेल।
     

धानेपुर एसओ अतुल चतुर्वेदी ने कुचक्र रच कर फिल्मी अंदाज में आरोपियों पर शराब छिड़क कर स्वयं अस्पताल ले जाकर फर्जी मेडिकल करा कर फर्जी धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया। यहां गौर करने वाली बात यह है कि क्या कोई अपराधी कभी पुलिस को फोन करके शिकायत दर्ज कराता है कि वह अपराध कर रहा है? अगर आरोपी फर्जी सप्लाई इंस्पेक्टर बन कर गए थे तो क्या वो फोन करके पुलिस को सूचना देते कि बाबागंज में सरकारी खाद्यान्न बेचा जा रहा है ? क्या पत्रकार द्वारा लिए गए बयान को अतुल चतुर्वेदी डिलीट करते ? और अगर आरोपी वाकई में सरकारी अधिकारी बन कर अवैध वसूली करने गए होते तो क्या ऐसे अपराधियों को जेल नहीं भेजना चाहिए था ? और उनका सिर्फ 151 सीआरपीसी में चालान किया गया होता? प्रकरण स्वतः आइने की तरह साफ है।



 इससे स्पष्ट रूप से फर्जी प्रतीत होता है। बाकी तो जांच का विषय है, लेकिन सच पर पर्दा डाल कर सरकारी खाद्यान्न बेचने वाले राजेन्द्र प्रसाद व विष्णु गुप्ता जैसे लोगों को बचाने के लिए एक पुलिस वाले का इतने बड़े स्तर की साजिश रचना वाकई चिंता का विषय है ! अगर ऐसा है तो अतुल चतुर्वेदी जैसे लोग समाज के लिए बड़ा खतरा हैं और ऐसे लोगों को पद पर आसीन रखना विभाग की बहुत बड़ी भूल होगी। इनके रहते हुए फिर कभी कोई अपराध की सूचना देने की हिम्मत नहीं कर सकेगा। यानी जनता को सलाह.... गांधी बनो.... बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो, बुरा मत कहो...!


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