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अमृत समान मां के दूध से बच्चों की बढ़ती है जीवन शक्ति


अखिलेश्वर तिवारी
बलरामपुर । । स्तनपान को बच्चे के बेहतर स्वास्थ्य की आधारशिला माना जाता है। प्रत्येक वर्ष स्तनपान की महत्ता को उजागर करने और इसके प्रति जागरूकता के लिए एक से सात अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह  मनाया जाता है। इस वर्ष सप्ताह का थीम-‘बेहतर आज और कल के लिए-माता पिता को जागरूक करें, स्तनपान को बढ़ावा दें’ रखा गया है।

अमृतपान से वंचित होते जिले के बच्चे 
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-4 के अनुसार बलरामपुर जिले में जन्म के एक घंटे के अंदर मात्र 28.8 प्रतिशत शिशु ही मां के गाढ़ा पीला दूध का सेवन कर पाते हैं। मात्र 68.6 प्रतिशत बच्चे ही जन्म से 6 माह तक सिर्फ मां का दूध पीते हैं जबकि, बच्चे के जन्म के एक घंटे के भीतर मां का पीला एवं गाढ़ा दूध एवं जन्म से 6 महीने तक सिर्फ मां का दूध बच्चे के बेहतर स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी माना जाता है। स्तनपान बच्चे के शारीरिक प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि कर बच्चे को रोगों से बचाये रखता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार स्तनपान करने वाली माताएं स्तनपान नहीं कराने वाली माताओं से ज्यादा स्वस्थ्य रहती हैं।

मां की जागरूकता से जुड़ा है बच्चे का स्वास्थ्य
गर्भावस्था से लेकर बच्चे के दो साल तक का समय यानी 1000 दिन का सदुपयोग ही बच्चे के सम्पूर्ण मानसिक एवं शारीरिक विकास के लिए जिम्मेदार माना जाता है। गर्भावस्था के दौरान माता का संतुलित एवं पोषक आहार बच्चे के पूर्ण मानसिक विकास में सहयोगी होता है। साथ ही बच्चे को जन्म के बाद होने वाले कुपोषण से भी बचाव करता है। बच्चे के बेहतर स्वास्थ्य के लिए जन्म के एक घण्टे के भीतर मां का गाढ़ा पीला दूध, 6 माह तक सिर्फ मां का दूध एवं 2 साल तक स्तनपान कराना माता की जागरूकता का परिचायक है। एक जागरूक और स्वस्थ्य मां ही अपने बच्चे के बेहतर स्वास्थ्य को सुनिश्चित कर सकती हैं।

स्तनपान सप्ताह की सफलता को सामुदायिक जागरूकता जरूरी
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. घनश्याम सिंह ने बताया कि जिले में एक से 7 अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जाएगा। स्तनपान विषय में आम जागरूकता बढ़ाने की जरूरत भी है। यदि लोग स्तनपान के फायदों से अवगत होंगे तभी इसमें इजाफा हो सकता है। संस्थागत प्रसव के एक घण्टे के भीतर बच्चे को स्तनपान सुनश्चित कराने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की होती है, लेकिन 6 माह तक सिर्फ स्तनपान कराने के लिए लोगों को भी जागरूक होने की जरूरत है।  स्तनपान सप्ताह में स्तनपान के विषय में आशा एवं एएनएम का क्षमता वर्धन किया जाएगा। साथ ही इनके द्वारा स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए सामुदायिक जागरूकता भी की जाएगी।

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