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मुजेहना के आश्रय केंद्र में अव्यवस्थाओं का लगा अम्बार, टूटे नाद, जलापूर्ति ठप, पशु खा रहे सूखा भूसा



रमेश कुमार मिश्रा 

 गोंडा:प्रदेश की प्रथम मॉडल गौ आश्रय केंद्र में इन दिनों अब्यवस्थाओ का अम्बार लगा हुआ है, पिछले दिनों जिला प्रशासन ने सड़क पर घूम रहे मवेशियों को आश्रय केंद्र पहुंचाने के लिए फरमान जारी किया था ,उसके बाद से कर्मचारी सड़क पर घूमने वाले पशुओं की धरपकड़ में लगे हैं। 

लेकिन आश्रय केंद्र में व्याप्त अब्यवस्थाओ को दूर करने के लिए जिम्मेदारी रूचि नही दिखा रहे हैं जिसके चलते केंद्र की ब्यवस्था ढर्रे पर नज़र आ रही है।विकास खण्ड मुजेहना के ग्राम पंचायत रुद्रगढ़ नौसी में स्थित मॉडल गौ आश्रय में 450 छोटे बड़े मवेशियों को रखा गया है, जिसकी देखभाल में कुछ बारह मजदूर काम करते हैं।मंगलवार को आश्रय केंद्र का हाल देखने पर मिला की जिन नादों में पशुओं को चारा खिलाया जाता है वो पूरी तरह टूट चुकी है, नादों में पानी की एक बूँद भी नही होती केवल सूखा भूसा खिलाया जाता है।मौके पर महज चार मजदूर मिले उन्होंने बताया की आधे मजदूरों की ड्यूटी रात में होती है, जबकि रात में केवल रखवाली के लिए महज एक चौकीदार की ज़रूरत होती है। दिन में पशुओं को खिलाने उनकी देख भाल के लिए अधिक लोगों की आवश्यकता होती है।

मवेशियों के लिए पानी पम्पिंग सेट लगा कर हौज में भर दिया जाता है।भीषण गर्मी में उन्हें स्वच्छ ताजा पानी भी मुहैय्या नही हो पाता, परिसर में बने तालाबों में जमा गन्दा पानी मवेशियों को और बीमार बनाता है। पता करने पर मालूम हुआ की आश्रय केंद्र में जल आपूर्ति के लिए लगा सोलर पम्प कई महीनों से खराब है, सामने स्थित आश्रय केंद्र के दूसरे भाग में भी कुछ माह पूर्व एक और सोलर पम्प लगा था जो चोरी हो गया था, तब से उसकी भी मरम्मत नही कराई गयी, स्थित जस की तस बनी है, महज एक हैण्डपम्प के सहारे साढ़े चार सौ मवेशी आश्रय केंद्र में रह रहे हैं। संचालक श्याम दीन यादव से सम्पर्क किये जाने पर पता चला की वे कचेहरी गए हुए हैं।

खण्ड विकास अधिकारी राजेन्द्र प्रसाद यादव ने बताया की पशुओं को सूखा भूसा खिलाये जाने का मामला संज्ञान में आया है। परिसर में जो नाद बने हुए है वे बहुत पुराने हैं टूट चुके हैं उनकी मरम्मत कराई जायेगी, खराब पड़े सोलर पम्प के विषय में पूछे जाने पर उन्होंने कहा की आपको जो कुछ जानकारी चाहिए ब्लॉक मुख्यालय पर आइये बैठ कर बात करते हैं। बात इतने पर भी खत्म नही हो जाती, आश्रय केंद्र में मौजूद रहे ग्राम प्रधान प्रतिनिधि मन्सूर अली से बात किया गया तो उन्होंने बताया की आश्रय केंद्र में बने तालाब में मछली पालन किया गया है उसे देखने आया था, जानकारी मिलने पर जो भी समस्या है उस पर काम किया जाएगा। आश्रय केंद्र की ये प्रमुख समस्या है आगे की पड़ताल में और भी जानकारियां जुताई जा रही हैं।

बताते चले की इस आश्रय केंद्र में 24 लाख रूपये की लागत से बायोगैस प्लांट तकरीबन बन कर तैयार हो चुका है, उसका कुछ भाग निर्माणाधीन है।

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