सुनील गिरी
हापुड़ । पिछले कई माह से आंदोलन कर रही आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां शासन-प्रशासन के पूरी तरह से रडार पर हैं। इनके खिलाफ पूरी तरह से कार्रवाई की तैयारी कर ली गई है। दूसरी तरफ आंगनबाडी कार्यकर्ताओं ने भी आंदोलन को तेज करने की धमकी दी है। कहा है कि जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता है वह आंदोलन जारी रखेंगी। कुल मिलाकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की नौकरी भी खतरे में पड़ सकती हैं। इसके बावजूद उनका धरना प्रदर्शन नगर पालिका में चल रहा है। जिले में शहर को छोड़कर कुल चार विकास खंडों में कुल 935 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं। सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर सीडीपीओ की तैनाती की गई है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को प्रतिमाह 3500 रुपये मानदेय तथा सहायिकाओं को 1500 रुपये मानदेय दिया जाता है। यह गांव में जहां गर्भवती महिलाओं के लिए पंजीरी बंटवाती हैं वहीं गर्भवती महिलाओं की तरह-तरह की सहायताएं भी करती हैं। पिछले तीन माह से लगातार अपनी तेरह सूत्रीय मांगों को लेकर आंगनबाड़ी कायकर्ता आंदोलित हैं। इसकी वजह से गर्भवती महिलाओं सहित गांवों में महिलाओं व बच्चों को सरकार की योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। सभी आंगनबाड़ी केंद्र पर ताले लटके हुए हैं। यही नहीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता लखनऊ जाकर भी धरना प्रदर्शन कर चुकी हैं। यहां आश्वासन दिया गया लेकिन इसके बावजूद इनका आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा है। दूसरी तरफ जिला कार्यक्रम अधिकारी शोभा ने भी कड़ा रुख अपनाया है और अब तक अधिकाशं कार्यकर्ताओं का मानदेय रोक दिया गया है। इसकी वजह से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं में हड़कंप की स्थिति व्याप्त है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता है तो उनका आंदोलन जारी रहेगा। ऐसे में प्रशासन व कार्यकर्ताओं की हठ की वजह से अब स्थिति पूरी तरह बिगड़ सकती है। प्रशासन इन कार्यकर्ताओं को अब बर्खास्त करने की तैयारी में जुटा हुआ है। कुल मिलाकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं पर शासन-प्रशासन की तलवार किसी भी समय घूम सकती है।
यह है आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां की मांगें
1. उत्तर प्रदेश सरकार अपने घोषणा पत्र का पालन कर 15000 आंगनबाड़ी व मिनी आंगनबाड़ी को तथा सहायिका को दस हजार रुपये मानदेय दिया जाए।
2. अपने अधिकारियों को निर्देश प्रदान करें कि श्रम कानून यानी ट्रेड यूनियन एक्ट में दर्ज आंगनबाड़ी संघ को दे तथा हर तीसरे महीने आंगनबाड़ी संघ को सेवा समस्या सुनकर समाधान करें।
3. सरकार 28 दिसंबर 2018 के मुख्य सचिव के साथ हुए समझौते का अनुपालन कराए। साथ ही 29 सितंबर 2012, 8 मार्च 2013, 22 जून 2013, 12 फरवरी 2014, 17 सितंबर 2015, 28 दिसंबर 2016 एवं 30 जून 2017 का पालन कराया जाए।
4. आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को 15 दिन का मानदेय सहित चिकित्सावकाश और इलाज के लिए धनराशि दी जाए।
5. आंगनबाड़ी कार्यक्रम विकेंद्रीकृत कर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के हर पांच साल में कुर्सी मेज, बाक्स, आवश्यक बर्तन खरीदने, बच्चों के ड्रेस, बैठने के लिए टाट पट्टी और मुफ्त नर्सरी स्तर का कलर, पेंसिल, बैग और स्लेट प्रदान किया जाए।
6. आंगनबाड़ी केंद्रों के मरम्मत का पैसा दिया जाए। परियोजना कार्यालय में मी¨टग हाल और एमपीआर फी¨डग के लिए कम्प्यूटर और आपरेटर दिया जाए।
7. अन्य राज्यों की तरह पेंशन की धनराशि सेवानिवृत्ति के बाद देकर सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जाए।
8. कार्यकर्ताओं को प्राथमिक शिक्षकों व पंचायत मित्रों व ग्राम पंचायत अधिकारियों में 25 प्रतिशत का कोटा दिया जाए।
9. वार्षिक मानदेय वृद्धि 200 प्रति कार्यकर्ता व 100 रुपये प्रति सहायिका को दिया जाए।
10. हाट कुक्ड मीड 300 दिन का बजट न देने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
11. निदेशालय के पद से अधिक संख्या के अधिकारियों व कर्मचारियों को हटाकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की मदद के लिए परियोजनाएं भेजी जाए।
12. ग्रीन चार्ट, वजन मशीन रजिस्टर की व्यवस्था की जाए।
13. केंद्रीकृत पोषाहार खरीद, मेडिसिन व खिलौना किट्स घोटाले की जांच कराई जाए।
जिला कार्यक्रम अधिकारी शोभा रानी का कहना है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हर हाल में अपने-अपने केंद्रों को सुचारू रूप से संचालित करें। अगर जल्द वह धरना प्रदर्शन से बाज नहीं आते हैं तो सभी के विरुद्ध बर्खास्तगी की कार्रवाई की जाएगी।


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