सत्येन्द्र खरे
कौशाम्बी:सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ भलेही प्रदेश में कानून का राज कायम करने के लिए प्रयास रत हो लेकिन कौशाम्बी जिले में इसका कोई असर दिखाई नहीं पड़ रहा है। मामला जिले के एक गाँव का है, जहां दंबगों के आगे पुलिस भी बे-वश सी नजर आ रही है। इस गाँव का एक गरीब परिवार जब नोएडा शहर से मजदूरी कर घर लौटा तो उसने पाया कि दंबगों ने उसके मकान को नेस्त-नाबूत कर मैदान के रूप में तब्दील कर दिया है। हद तो तब हो गई जब परिजनों को पता यह चला कि अब वह जमीन भी उसकी नहीं रही जहां कभी उसके बच्चों की किलकारियां गूंजी थी, माँ की ममता का साया और पिता की मौत से जुडी यादें जुडी थी। मजबूरी वश परिवार के लोग अपनी जमीन पर इस बारिश के मौसम में झोपडी डालकर रहने को मजबूर है। वहीं इस सब के बाद भी संबधित थाने की पुलिस हाथ पर हाथ रखे बैठी हुई है।
जिले के थाना पश्चिम शरीरा अंतर्गत ग्राम पचावा निवासी अनिल कुमार की माँ की माली हालत को देखते हुए शासन ने वर्ष २००९ में इंदिरा आवास स्वीकृत किया था। माँ के निधन के बाद जब पुत्र अनिल के पास कमाई का गाँव में कोई चारा शेष नहीं रहा तो वह अपनी पत्नी और तीन वर्षीय पुत्री को लेकर नोयडा मजदूरी करने हेतु चला गया। नोयडा से जब कभी तीन चार महीने में समय मिलता यह दम्पत्ति अपने घर आया करते थे। बीते तीन माह बाद जब यह परिवार अपने घर आया तो उसने पाया कि जहां पहले कभी घर हुआ करता था, अब वहां मैदान है। मकान के अंदर रखा घर गृहस्थी का सामान तो गायब था ही साथ ही मकान के अवशेष ईट, खम्मा तक गायब थे। जानकारी करने पर पता चला कि यह सब किसी और ने नहीं बल्कि गांव के ही दंबग रमेश पटेल ने किया है। दम्पत्ति के पैरों तले जमीन उस वक्त खिसक गई जब रमेश ने उन्हें बताया कि जहां पहले उसका मकान हुआ करता था अब वह जमीन भी उसकी नहीं रही और किसी दूसरे को बेंच दी गई है। पीड़िता दम्पत्ति ने मामले की शिकायत संबधित थाने में भी की, लेकिन पुलिस ने उनकी एक न सुनी। मजबूरीवश अब यह परिवार अपनी जमीन पर बारिश के मौसम में झुग्गी डालकर रह रहा है। अनिल के पड़ौसी बताते है कि उन्होंने दंबग जब मकान गिरा रहा था तो इसका विरोध किया था, लेकिन दंबग ने उन्हें भी धमका कर शांत कर दिया।
बहरहाल मीडिया की दखल अंदाजी के बाद अब पुलिस के आला अधिकारी भी मामले की सत्यता को मानते हुए जांच और कार्यवाही की बात कर रहे है। सीओ मंझनपुर मोईन अहमद ने बताया की आरोपियों के विरुद्ध भी मुकदद्मा दर्ज हो गया है। पीड़ित को कब्जा भी दिला दिया गया है


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