राकेश गिरी
बस्ती।समाजवादी चिन्तक डॉ. राम मनोहर लोहिया को उनके 50 वें पुण्य तिथि पर याद किया गया। समाजवादी शिक्षक सभा द्वारा गांधी कला भवन परिसर में आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुये डा. अजय पाण्डेय ने कहा कि आजादी, समता, सम्पन्नता, अन्याय के विरुद्ध जेहाद और समाजवाद की फिजा। आज वह फिजा भी नहीं है, लोहिया भी नहीं है, लेकिन दूसरों के लिए जीने वाला कभी मरता नहीं। लोहिया आज भी अपने विचारों में जीवित है। लगन, ओजस्विता और उग्रता- प्रखरता को जब तक गुण माना जायेगा, लोहिया के विचार अमर रहेंगे।
बताया कि डा. राम मनोहर लोहिया का जन्म 23 मार्च 1910 को हुआ था और मृत्यु 12 अक्टूबर 1967 को हो गयी थी। डॉ लोहिया उनका जन्मदिन नहीं मनाते थे क्योंकि 23 मार्च शहीदे आजम भगत सिंह का शहादत दिवस है। लोहिया आजाद भारत के उन कुछ चुनिंदा राजनेताओं में शुमार किए जा सकते हैं जो मौलिक विचारक होने के साथ-साथ देश में मातृभाषा के पक्षधर थे। हालांकि वे हिंदी के अलावा अंग्रेजी और एक और दूसरी भाषा जर्मन के भी जानकार थे। डॉ लोहिया ने डॉक्टरेट की डिग्री जर्मनी के हम्बोल्ट यूनिवर्सिटी से हासिल की थी।
डा. लोहिया के पुण्य तिथि पर आयोजित कार्यक्रम को डा. जय प्रकाश पाण्डेय, डा. सूर्य प्रकाश त्रिपाठी, सत्येन्द्र चौधरी, डा. अतुल पाण्डेय, डा. संदीप मिश्र आदि ने सम्बोधित किया। कहा कि डॉ लोहिया उनकी लेखनी, ठेठ देसी ठसक और कर्मवीरता की वजह से सदियों याद किए जाते रहेंगे। स्वतंत्र भारत के सबसे प्रखर व मौलिक राजनेता व चिन्तक के विचारों से जिन्हें याद करना और उन पर चलना पहले की तुलना में और भी जरूरी हो गया है।


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