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यूपी की बेटी विलासपुर मे कर रही है नाम





एक रूपये के सहयोग के बदौलत समाज से अशिक्षा का अंधकार मिटाने का उठाया है वीणा

दर्जन भर अधिक गरीब बच्चो की अदा कर चुकी है फीस 
शिवेश शुक्ल

ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जो बलिकाओं से अछूता है। कई क्षेत्रों में तो बालिकाओं ने बालकों को पीछे छोड़ दिया है। पढ़ाई, लिखाई, संस्कार और अनुशासनप्रियता के लिए वे जानी जाती है। जब परीक्षाओं के परिणाम आते हैं, तो लगभग हर परीक्षा में उनकी सफलता का प्रतिशत अधिक होता है। धैर्य, लगन शीलता तथा साहस बालिकाओं में कूट-कूटकर भरा होता है। अंतरिक्ष, विभिन्न प्रकार के खेलों, लेखन तथा विज्ञान इत्यादि क्षेत्रों में बालिकाओं ने अपनी उपलब्धिओं को लोहा मनवाया है। धर्म तथा समाजसेवा के क्षेत्रों में भी अपने कार्यों से वे समाज के लिए प्रकाश का केन्द्र बन गई हैं।

एक ऐसी होनहार बेटी से गत दिवस छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एबीपीएसएस द्वारा आयोजित पत्रकार राष्ट्रीय महासम्मेलन के दौरान हुई तो उसकी दृढ़ इच्छा व कार्यों की सराहना जितनी की जाए, कम है। उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद बेलथरा क्षेत्र की मूल निवासी सीमा वर्मा जिनका परिवार छत्तीसगढ के बिलासपुर में रहना लगा। आज वह अपनी पढ़ाई के साथ-साथ बिलासपुर व आस-पास के जनपदों में गरीब, असहाय बच्चों केे भविष्य को संवारने का वीणा उठाया है। सीमा वर्मा विद्यालयों में शिक्षा ग्रहण कर रहें गरीब छोेटें बच्चों की फीस अदायगी कर समाज से अशिक्षा का अंधकार मिटाने के लिए कृत संकल्पित हैं। वह भी सिर्फ एक-एक रूपए का वह घूम-घूम कर लोगों से सहयोग मांगती हैं। उस एक रुपये का प्रयोग वे किसी ऐसे छात्र या छात्रा की शिक्षा में करती है, जो धनाभाव में पढ़ न पा रहा हो। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जनपद की रहने वाली उत्तर प्रदेश की बेटी सीमा वर्मा का नाम अब किसी परिचय का मोहताज नहीं है।
अपनी मुस्कान तथा मधुर व्यवहार से हर मिलने वाले को प्रभावित कर लेती हैं। अपना उद्देश्य बताते हुए लोगों से एक रुपया का सहयोग मांगती हैं। छोटी धनराशि देने में लोग हिचक भी नहीं दिखाते हैं। इनका पवित्र लक्ष्य सबका ध्यान आकर्षित करता है। लोगों के मुँह से इनकी प्रशंसा के दो शब्द बरवस फूट ही पढ़ते हैं। अच्छे कार्यों की सुगंध फैलने में देर नही लगती। बिलासपुर मीडिया में इनकी अच्छी खासी चर्चा रहती है। युवा इनसें प्रेरणा लेते हैं और बुर्जुग अपनी संतानों इनके जैसा बनने का परामर्श देते हैं। सीमा बताती हैं अब तक दर्जन भर अधिक गरीब छात्र-छात्राओं की मदद मांगी हुई एक रुपए के बल पर कर उनकें जीवन अशिक्षा का अंधकार मिटाने का सफल प्रयास कर चुकी हैं। इतना ही नही ऐसे तमाम गरीब बच्चे सीमा के एक रुपये की ताकत से सहायता प्राप्त कर अपनी आगे की पढ़ाई जारी रख सके जो शायद बिना सहायता से आगे न पढ़ पाते।
उक्त होनहार बेटी बिलासपुर के साथ ही अन्य आस पास के जनपदों में अपनी एक रुपए के अभियान से सोशल मीडिया के बदौलत व जाकर जोडने का प्रयास कर रही हैं। सीमा बताती हैं कि उक्त अभियान के प्रेरणा उनकों उस समय महसूस हुई जब एक विकलांग दोस्त को ट्राईसाइकिल मुहैया करवानी थी, उन्होंने इसके लिए विद्यालय प्रशासन से गुहार लगाने के साथ-साथ कई दरवाजे खटखटाएं किन्तु काम न बनता देख लोगों की राय पर वह अपने क्षेत्र के जिला प्रशासन से मिल अपने दोस्त की व्यथा की कहानी सुनाई तो जिला प्रशासन ने तत्काल् ट्राईसाइकिल मुहैया कराकर सीमा की मदद की। इस होनहार बेटी ने अपने एक रुपए के अभियान की सोच बनाते हुए गरीब व असहाय बच्चों को शिक्षा मुहैया कराकर ले जाने का मन बनाया और वह अभियान आज भी जारी है। बिलासपुर के साथ अब वह अन्य प्रान्तों में भी उक्त अभियान से लोगों को जोड़ने के प्रयास में लगी हुई हैं।

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