सुनील उपाध्याय
बस्ती यूपी। बस्ती जिले में बेसिक शिक्षा विभाग में व्याप्त भ्रष्ट्राचार का असली नमूना सामने आया है जिसके चलते बच्चों का भविष्य खतरे में पड़ गया है और स्कूल को प्रबंधन ने जिलाधिकारी कार्यालय के सामने शिफ्ट कर दिया है और मान्यता में देरी और लापरवाही का खमियाजा स्कूल के बच्चों को भुगतना पड़ रहा है।
जिले के रामनगर ब्लाक के हजरत मोहम्मद पब्लिक स्कूल के बच्चे जिलाधिकारी कार्यालय पर धरने पर बैठ कर पढ़ाई कर रहे है। प्रबंधतंत्र मामला रिश्वतखोरी से जुड़ा होना बता रहा है। स्कूल के मान्यता की फाइल तीन साल लंबित है जिसका निस्तारण नहीं हो सका है। जिसका असर यह हुआ कि स्कूल को बंद कराने स्थानीय प्रशासन पहुंच गया। जब इस कार्यवाही की सूचना विद्यालय को मिली तो तमाम तथ्य सामने खुलकर आ गयी। जिसमे बीएसए कार्यालय में तैनात लिपिक संतोष गुप्त द्वारा 80 हजार रिश्वत देने के बाद विद्यालय मान्यता फाइल निस्तारित करने की शर्त रखी गयी थी जिसे पुरा करने में प्रबंधन ने मना कर दिया जिसका असर यह हुआ कि न तो स्कूल की मान्यता मिली और न ही मान्यता के कागजो में कोई आपत्ति लगाई गई फलस्वरूप रिश्वत न देने पर स्कूल को बंद करने का आदेश जारी कर दिया गया। ये पब्लिक स्कूल चूंकि मुस्लिम माइनॉरिटी सोशल एंड एजुकेशनल के तहत चल रहा था जिसकी शिकायत गांव के पूर्व प्रधान लगातार कर रहे थे जिसमें सरकार के मंत्री ने भी बंद करने के आदेश खण्ड विकास अधिकारी को दिए थे। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्या इस प्रकार के जब सैकड़ों अन्य विद्यालय भी बिना मान्यता के चल रहे हैं तो इस विद्यालय को ही राडार पर क्यो लिया गया कहीं माइनारिटी होना इनके लिए अभिशाप बन गया जिसमें अच्छी पढ़ाई और हर वर्ग के बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।


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