सूख चुके है ताल तलय्या,अब तो आजा बादल भय्या
मोजीम खान
सिंहपुर(अमेठी)एक समय ऐसा भी था जब लोग गाँवों मे बन रहे आदर्श तालाब की तारीफ किया करते थे इतना ही नही आदर्श तालाबों की सुन्दरता लोगो को अपनी आेर आकर्षित कर लेता था लेकिन आज सब उसके विपरीत है गाँव वालो को कौन कहे अधिकारी भी आदर्श तालाबों को दोबारा मुड़कर देखना मुनासिब नही समझ रहे है।भारत सरकार का सपना तो आदर्श तालाब का नाम देकर पूरा कर दिया गया।लेकिन जिस उददेश्य के साथ आदर्श तालाबों मे लाखो रुपये खर्च किये गये वह उददेश्य पूरा होता नजर नही आ रहा है भारत सरकार का उददेश्य था कि प्रत्येक ग्राम सभा मे तालाबों कि खुदाई करवाया जाये और सब तालाबों मे से एक को चिन्हित कर उसे सुसज्जित करने के साथ ही आदर्श तालाब का नाम दिया जाय।जिससे उसमे पानी का संरक्षण हो सके।आदर्श तालाबों का निर्माण तो हो गया,लेकिन उसमे पानी के स्थान पर धूल उड़ रही है।अभी सर्दी का मौसम पूरी तरह खत्म भी नही हुआ है कि पानी कि समस्या उभरने लगी है।तालाबों मे पानी न होने से जंगली जानवरों को प्यास से हांफते हुये आसानी से देखा जा सकता है। विकास खण्ड सिंहपुर क्षेत्र के लगभग सभी ग्राम पंचायतो मे तालाबों कि खुदाई की गई उन सभी तालाबों मे से एक तालाब को विशेष स्थान दिया गया जिसे देखकर,आदर्श तालाब के नाम से लोग जानते और पहचानते है क्षेत्र के पूरे काशी मजरे शेखनगाँव,राजाफत्तेपुर,जयनगरा,को टवा,भीखीपुर,आजादपुर,जिजौली आदि सहित अन्य ग्राम सभा मे बना आदर्श तालाब अपनी बदहाली पर आँसू बहा रहा है विभागीय अनदेखी से आदर्श तालाबों की बाउंड्रीवाल ढह गई और उसमे लगे लोहे का इंगल व गेट गायब हो गया जिसकी सूचना भी अधिकारियों ने स्थानीय पुलिस को देना उचित नही समझा। अब न तो ग्राम प्रधान दोबारा इस तालाब को देखना उचित समझ रहे और न ही विभागीय अधिकारी।मनरेगा के तहत खुदवाए गये तालाबों मे ज्यादातर तालाब अपनी दुर्दशा पर आँसू बहा रहे है।जिस उददेश्य के लिये भारत सरकार ने ग्राम पंचायतों मे तालाब खुदवाया है उस पर पानी फिरता दिखाई पड़ रहा है आलाधिकारियों की बड़ी लापरवाही से भारत सरकार का करोड़ों रुपये पानी की तरह बह गया है और सरकार का उददेश्य भी पूरा होता दिखाई नही दे रहा है ग्राम सभाओं मे बने आदर्श तालाबों को देखकर लोग खुश होते थे तो साथ ही लोगो को बैठने के लिये भी उत्तम व्यवस्था की गई थी आदर्श तालाबों की सुन्दरता के लिये पौधरोपणऔर तालाब के चारो और बाउंड्रीवाल या इंगल के सहारे कटीले तार लगाये गये थे जिससे की जानवर अंदर न आ सके।अब न तो आदर्श तालाब मे बाउंड्रीवाल रह गई है और न ही लगे इंगल के साथ कटीले तार बचे है ज्यादातर तालाबों मे घास पूस और कटीले बबूल उगे हुये है ये आदर्श तालाब विभागीय लापरवाही के शिकार हो गये है।


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