शिवेश शुक्ला
प्रतापगढ़। मित्रता में वह शक्ति होती है जिससे बड़े-छोटे का भेद खत्म हो जाता है। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने बचपन के मित्र सुदामा के द्वारिका आने पर जिस प्रकार दौड़ते हुए गले लगाया और अपने अश्रु मोतियों से सुदामा के पैर धोये, वह सही अर्था में मित्रता को परिभाषित करता है। श्रीकृष्ण की एक मात्र सत्य है और वे ही सम्पूर्ण जगत के एक मात्र आधार है।
उनका ऐश्वर्य, माधुर्य, सौन्दर्य अनंत है, इसलिए ऐश्वर्य, माधुर्य, सौन्दर्य से युक्त श्रीकृष्ण की लीला कथा भी अनंत है। उक्त बातें पट्टी इलाके के विरौती गांव में चल रही श्रीमद भागवत कथा में कथा व्यास संजय शरण शांडिल्य ने कही। कथा को आगे बढ़ाते हुए उन्होनें कहा कि श्रीकृष्ण ने सुदामा के बिना मांगे ही सुरामा को समस्त ऐश्वर्य प्रदान कर दिया।
इस जीव के सच्चे मित्र भगवान श्रीकृष्ण ने एक बार जब राजा यदु की भगवान दत्तात्रेय से भेंट हुई तब राजा यदु ने दत्तात्रेय से सांसारिक विषयों से निश्चिंत होने का उपाय पूंछा। इस पर दत्तात्रेय ने क्षमा, समता, स्वाभाव में शीलता, विवेक, ज्ञान, सांसारिक मोह से मुक्त, संतोष, सुख, दुख में समान आचरण, भोलापन आदि 24 प्रकार के स्वभावों को अपनाने को कहा। दत्तात्रेय ने बताया कि इस प्रकार के स्वभाव से जीव समस्त प्रकार की चिंताओं से मुक्त हो जाता है।
कथा व्यास ने श्रोताओं को बताया कि इस कलयुग में एक बहुत ही सरल-सुंदर साधन है जिसको कर लेने से यह जीव समस्त पापों से मुक्त हो जाता है। उन्होनें बताया कि जीव निरंतर भगवान का स्मरण करें तो अजामिल जैसे पापी का कल्याण हुआ वैसे होना तय है। इस अवसर पर तीर्थराज पाण्डेय, चन्द्रिका प्रसाद शुक्ल, रामराज ओझा, शीतला प्रसाद पाण्डेय, सूर्य नारायण ओझा, लवकुश महराज, अशोक कुमार पाण्डेय, राजीव कुमार पाण्डेय, नागेन्द्र शर्मा समेत तमाम भगवत प्रेमी मौजूद रहे।


एक टिप्पणी भेजें
0 टिप्पणियाँ