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योगी जी ! गोण्डा में एसडीएम से भी बड़ा लेखपाल









दूसरे की जमीन पर जबरन कर रहा कब्जा
ए. आर. उस्मानी
गोण्डा। मोतीगंज थाना क्षेत्र के एक गांव में दूसरे की जमीन पर एक दबंग लेखपाल व करीब आधा दर्जन अन्य लोग रसूख के बल पर जबरन कब्जा कर रहे हैं। इसकी शिकायत पीड़ित द्वारा एसडीएम से की गई, जिसे गंभीरता से लेते हुए उन्होंने थानाध्यक्ष को कब्जा रोकवाने का आदेश दिया, लेकिन बेलगाम लेखपाल ने एसडीएम का भी आदेश मानने से साफ इंकार कर दिया। हद तो यह है कि वह पुलिस कर्मियों से भी उलझ गया। 
      






जिले की सदर तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायत सीहागांव निवासी मैनुद्दीन पुत्र अब्दुल हकीम ने 25 दिसंबर को एसडीएम को प्रार्थना पत्र देकर उसकी जमीन पर एक लेखपाल व अन्य लोगों द्वारा जबरन किए जा रहे कब्जे को रोकवाने की गुहार लगाई है। दिए गए प्रार्थना पत्र में उसने कहा है कि सीहागांव चौराहे पर स्थित गाटा संख्या 729 उसकी मां के नाम सम्पूर्ण बैनामा है, जिस पर वहीं के निवासी लेखपाल बद्री प्रसाद, सत्यदेव, रामदयाल व सदानंद आदि अपने रसूख के बल पर जबरन खुदाई कराकर नींव भरा रहे हैं। उक्त गाटा संख्या की कुल भूमि एक एकड़ 53 ढिस्मिल बताई जाती है।
     






मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम सदर एस.एन. तिवारी ने थानाध्यक्ष मोतीगंज को तत्काल जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने का आदेश दिया। सूत्रों के अनुसार सूचना पर पहुंची डायल 100 की अपाची टीम से बेलगाम लेखपाल व उसके सहयोगियों ने अभद्रता तक की। इसके बाद पीआरवी 0878 की टीम मौके पर पहुंची। उससे भी लेखपाल तथा उसके सहयोगियों ने उलझने का प्रयास किया, लेकिन टीम हरहाल में आदेश का पालन कराने पर डटी रही और उसने अवैध रूप से किए जा रहे निर्माण कार्य को रोकवा दिया।
बताया जाता है कि डायल 100 टीम के वहां से हटते ही दबंगों ने फिर निर्माण कार्य शुरू करा दिया। इसकी सूचना थानाध्यक्ष गोरखनाथ सरोज को दी गई, जिस पर उन्होंने एसआई सत्येंद्र वर्मा को मयफोर्स मौके पर भेजकर एसडीएम के अग्रिम आदेश तक निर्माण कार्य रोक देने की बात कही, लेकिन बेलगाम लेखपाल तथा उसके गुर्गे दरोगा से भी उलझ गए।
     







मामला 26 दिसंबर को फिर एसडीएम के समक्ष पेश किया गया, जिस पर उन्होंने थानाध्यक्ष को फोन पर तत्काल निर्माण कार्य रोकवाने का निर्देश दिया। इस पर एसओ ने फिर पुलिस टीम भेजा, लेकिन वह निर्माण कार्य रोकने के बजाय पुलिसकर्मियों से उलझ गया। बताते हैं कि जब पुलिस अपने पर आयी तब मौके की नजाकत को भांपकर लेखपाल ने निर्माण कार्य रोकवा दिया। हालांकि पुलिस के वहां से हटते ही काम फिर शुरू कर दिया गया। 
     




पीड़ित के अनुसार 26 दिसंबर को एसडीएम ने दोनों पक्षों को तलब किया। पीड़ित पक्ष एसडीएम के यहां पहुंचा लेकिन लेखपाल एसडीएम के आदेश को ठेंगा दिखाते हुए उक्त विवादित जमीन पर कब्जा करने में जुटा रहा। अब सवाल यह उठता है कि क्या एक लेखपाल इतना पावरफुल हो गया है कि उसके रसूख के आगे एसडीएम जैसे अधिकारी का आदेश भी कोई मायने ना रखे.?



क्या कहते हैं डीएम - एसडीएम

इस सम्बंध में जिलाधिकारी कैप्टन प्रभांशु श्रीवास्तव का कहना है कि एक पक्ष गलत शिकायत कर रहा है। उक्त जमीन से उसका कोई सरोकार नहीं है। वहीं एसडीएम एस.एन.तिवारी का कहना है कि विवादित जमीन पर किए जा रहे अवैध निर्माण को रोकवाने का निर्देश दिया गया है और दोनों पक्षों को उक्त जमीन से सम्बंधित समस्त कागजातों के साथ तलब किया गया है
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