दिल्ली :-(अनीता गुलेरिया) साउथ-वेस्ट द्वारका सेक्टर-10 मेट्रो स्टेशन की ओर वेलकम-होटल के पीछे रोड पर लगे स्ट्रीट-लाइट के खंभों पर केबल-ऑपरेटरो द्वारा लगाई गई अनगिनत-तारों की जमीन से महज दूरी 6-7 फूट ऊँची है । ऊपर से इलेक्ट्रिक-बॉक्स लगे होने से पूरी केबल का नीचे की तरफ लटकने से कुछ तारे दोपहिया-वाहनों में फंस जाने से टूट कर जमीन पर लटक रही हैं ।
जिससे हर राहगीर के गले और पैर में फांद की तरह फंस जाने से वह बुरी तरह से चोटिल हो रहे है । दोपहिया-वाहनों के लिए यह सबसे ज्यादा खतरे का सबब बनी हुई हैं । स्पीड से चलती बाइक में फंदा लगना,जोखिम-भरे जानलेवा खतरे से कतई कम नहीं है । लेकिन शिकायत के बावजूद प्रशासन-विभाग का इस पर कोई ध्यान नहीं जा रहा, लगता है,वह किसी बड़े हादसे के बाद ही अपनी कुंभकरनी नींद से जागेगा ।
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समझ नही आता, नियम अनुसार बिजली-विभाग अपने खंभों पर इन तारों को आखिर नीचे तक क्यो लटकने देता है ? दूसरी तरफ यहीं पर स्ट्रीट-लाइटे पेड़ों की ओट मे पूरी तरह से ढकी हुई हैं । जिससे पूरे रोड पर अंधकार-छाया रहता है । लेकिन नगर-निगम विभाग का भी पेड़ों की काँट-छँटाई पर कोई ध्यान नहीं है ।
अन्धेरे की वजह से यहां पर लूटपाट,स्नैचिंग जैसे केस आए दिन होते रहते हैं । इस तरह राजधानी-दिल्ली की सड़कों पर लटकती हुई तारे किसी जानवर को फंसाने के लिए बने फंदे की तरह जंगल की उपस्थिति का एहसास करवाती नजर आ रही हैं ।


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