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काहे का सरकारी अस्पताल,डॉक्टर ने लिखी बाहर की दवा और ठेलिया पर ही हुआ इलाज





अमरजीत सिंह
अयोध्या:प्रथम सन्दर्भन इकाई(एफआरयू)का दर्जा प्राप्त रुदौली सीएचसी में इन दिनों इलाज तो सरकारी हो रहा है पर दवाइयां बाहर से ही मंगाई जा रही हैं।यही नहीं मरीजों का ठेलिया पर ही इलाज किये जाने का भी मामला प्रकाश प्रकाश में आया है जबकि ऐसा नहीं है कि विभागीय जिम्मेदार इन सब चीजों से अनजान है।


फिर भी सरकारी अस्पतालों की स्थिति जस की तस बनी हुई है। शनिवार को रुदौली सीएचसी में इन्हीं सब चीजों को जानने के लिए जब पत्रकारों की एक टीम ने प्रयास किया तो सीएचसी रूदौली मे जो तस्वीर सामने आई तो वाकई में वह काफी हैरान करने वाली तस्वीर है।
लगभग 1:30 बजे सीएचसी रुदौली पहुंचने पर गेट के दाहिनी ओर एक वृद्ध ठेलिया पर लेटा हुआ दिखाई दिया तो उससे पूछा गया कि सरकारी अस्पताल में मरीज का इलाज कराने लाये हो तो उसके पुत्र ने बताया कि"काहे का सरकारी अस्पताल"डॉक्टर साहब ने लिखी है बाहर की दवाई और ढेलिया पर इलाज हो रहा है


उसने बताया कि मैं तहसील क्षेत्र के खतीरपुर गांव का निवासी हूं अपने पिता सियाराम के टीवी का इलाज कराने अस्पताल सुबह 11:00 बजे आया हूं।पुत्र का आरोप है कि यहां पर तैनात डॉक्टर द्वारा टीवी की निशुल्क दवा ना देकर बाहर के मेडिकल स्टोर से लगभग ढाई सौ रुपये की दवाइयां मंगाई गई है और सुबह 11:00 बजे से अब तक अस्पताल के अंदर मरीज का प्रवेश नहीं कराया गया है।वहीं मरीज का इलाज कर रहे डाक्टर मदन बर्नवाल ने बताया कि मरीज के दोनों फेफड़ों में टीवी है


उसको सांस लेने में ज्यादा दिक्कत हो रही थी इसलिए मैंने बाहर की दवा लिखी।अब सवाल यह उठता है कि टीबी का तो सरकारी अस्पतालों निःशुल्क इलाज है और इसकी दवाइयां पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहती हैं फिर भी टीबी की दवा बाहर से ही क्यों लिखी जाती है यह सोचने का विषय है और इस तरफ उच्च अधिकारियों की नज़र कब पड़ती है।

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