ए. आर. उस्मानी
गोण्डा। मनकापुर तहसील की ग्राम विद्यानगर में बने पशु चिकित्सालय में डॉक्टर नहीं मिलते हैं। पड़ोस के लोगों ने बताया कि कभी कभी डॉक्टर यहां दिखाई पड़ते हैं। यहां पशु चिकित्सालय का कोई भी बोर्ड नहीं लगाया गया है, जिससे तमाम लोग पशुओं को लेकर वापस चले जाते हैं और झोलाछाप तथाकथित पशु चिकित्सकों के चंगुल में फंसकर धन हानि तथा पशु हानि का खामियाजा भुगतते हैं।
क्षेत्र के विद्यानगर, भटिनिया, गढ़ी, रामपुर, पंडित पुरवा, सोठिया, सुमेरीपुर, बालपुर, दुबौली, लाल पुरवा समेत दर्जनों गांवों के लोग अपने बीमार पशुओं की दवा कराने अस्पताल आते हैं
तो उन्हें घंटों अस्पताल ढूंढने में लग जाता है। अगर वह पूछते हुए पहुंच भी जाते हैं तो देखते हैं कि ताला लगा है। विद्यानगर निवासी सुरेश तिवारी ने बताया कि हमारा एक बछवा बीमार था।
अस्पताल लेकर गए लेकिन डॉक्टर के ना मिलने की वजह से वह तड़प तड़प कर मर गया। इसी प्रकार दवा के अभाव में कई छुट्टा जानवरों की भी मौत हो चुकी है। लोग मजबूर होकर प्राइवेट डॉक्टरों से अपने पशुओं का इलाज कराते हैं। समय से इलाज ना होने के कारण पशुओं की मौत भी हो जाती है। सुरेश तिवारी ने बताया कि जिस समय हमारा बछवा बीमार हुआ था, उस समय हमने अस्पताल के कंपाउंडर शिव बहादुर सिंह से संपर्क किया था तो उन्होंने कहा कि मैं क्षेत्र में हूं। आकर देखता हूं और वह आए ही नहीं और बछड़े की मौत हो गई।



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