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केशव पुरम लारेंस-रोड पर जूता-चप्पल फैक्ट्री में लगी भयंकर आग


अनीता गुलेरिया
दिल्ली : उत्तर-पश्चिमी केशव पुरम में लारेंस-रोड पर बने रोड पर प्लास्टिक-जूता बनाने वाली फैक्ट्री और गोदाम मे आज सुबह साढे सात बजे के करीब लगी भयंकर आग । मौके पर पहुंची पुलिस और दमकल विभाग की पच्चीस से ज्यादा गाड़ियां ।

 रबड के जूतों में लगी आग ने जल्दी ही तीन मंजिला इमारत को अपने घेरे में लेते हुए भयंकर रूप इख्तियार   कर लिया । दमकल विभाग कर्मियों द्वारा काफी मुशक्कत करने के बाद आग पर काबू पाया जा सका । फैक्ट्री में रखा  सामान व मशीनें जलकर हुई राख ।

 तेज आग से बिल्डिंग की सारी दीवारें जर्जर हो गई है और बिल्डिंग कभी भी गिर सकती है । इस हादसे के बाद कोई और बड़ा हादसा ना हो जाए, इस पर प्रशासन-विभाग को तुरंत सख्ती से कार्रवाई करने की जरूरत है । जूता फैक्ट्री जहां पर प्लास्टिक के जूते बनने का काम होता था, पांच सौ स्कवेयर फीट मे बनी यह तीन-मंजिला इमारत है ।  

पुलिस ने आग लगने का मुख्य कारण शॉर्ट-सर्किट बताया है ।  सुबह सात बजे लगी आग मे गनीमत यह रही,कि उस समय गोदाम के अंदर कोई कारीगर मौजूद नहीं था । इस वजह से फैक्ट्री में जानमाल का बड़ा हादसा होने से टल गया । यदि फैक्ट्री के अंदर कोई होता तो उसका बचना नामुमकिन था । पूरी तरह से राख बन चुकी,अब यह जर्जर-इमारत आसपास के लोगों के लिए जान के खतरे का सबब बन गई है । 

सूत्रों अनुसार रिहायशी-इलाके में कई लोगों के घर भी बने होने से भयंकर आग और धुए  को देखकर लोगों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया । रिहायशी इलाके में इस तरह के फैक्ट्री गोदाम आखिर क्यों लगाए जाते हैं ? जिससे हजारों लोगों की जिंदगियो को खतरे में डाला जाता है किसलिए ? क्या सरकार द्वारा देश की जनता को संरक्षण इस तरह से दिया जा रहा है ? 

सरकार इस पर कोई कड़ा कदम क्यों नहीं उठाती ? आग पर जल्दी काबू पा लेने से बिल्डिंग के साथ बने घरों में आग की पकड़ ना होने से बड़ा हादसा होने से टला ।यहाँ प्रश्न यह उठता है कि प्लास्टिक . जूता फैक्ट्री को इस रिहायशी इलाके में लगाने की इजाजत कैसे मिल गई ? या फिर बिना  किसी जांच किए इसको लगाने दिया गया । 

यह जांच का मुख्य विषय है । प्रशासन-विभाग  द्वारा इस पर सख्ती से कार्रवाई  करते हुए फैक्ट्री-लाइसेंस रद्द किया जाना चाहिए। क्या दिल्ली-सरकार इस तरह से दिल्ली की जनता का संरक्षण करने पर तुली है ? अवैध तरीके से चल रही फैक्ट्रियों को रिहायशी इलाकों से हटाया नहीं जा रहा । एक इंसान के लिए हजारों-जिंदगियों के साथ खिलवाड़ आखिर क्यों ?
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