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जान जोखिम में डालकर अंग्रेजो के ज़माने में बने पुल को पार करने के लिए विवश है मनकापुर के ग्रामीण


दुर्गा सिंह पटेल 
मनकापुर गोंडा: देश की आजादी के बाद केंद्र व प्रदेश में कई सरकारें आई और गई लेकिन  मनकापुर और गौरा विधानसभा क्षेत्र का महज कुछ किलोमीटर की दूरी में संगम करवाने वाला अंग्रेजों के जमाने  के जर्जर पुल से  जान जोखिम में डालकर लोग गुजरने को मजबूर हैं | मनकापुर तहसील क्षेत्र के माईराम कुटी दिनकरपुर के समीप मनवर नदी पर बने पुल से ग्रामीण जान जोखिम में डालकर गुजरते हैं |
      
 ग्रामीण बताते हैं कि इस पुल से गुजरने के दौरान कई बार लोगों से चूक हो गई है | लोग  पुल से नीचे नदी में जा गिरे हैं |  ग्रामीणों ने बताया कि इस रास्ते से आवागमन करने में ग्रामीणों को तहसील मुख्यालय तक पहुंचने में 15 किलोमीटर की दूरी का बचत होता है | जिससे राहगीर इसी पुल से आना जाना उचित समझते हैं |

 सूबे के समाज कल्याण मंत्री रमापति शास्त्री के विधानसभा क्षेत्र में आने वाला माई जी पुल विकास का आस लिए जर्जर अवस्था में खड़ा है | यह पुल चांदपुर  बरसैनियाँ, दिनकरपुर, घुनाही, बल्लीपुर, बेनीपुर, कटहर बुटाहनी, लमती,  उकराहवा, पेरीपोखर, पचपुतीजगतापुर, कुड़वा जंगली, मल्हीपुर, खरकाबगिया, अमघटी, तामापार सहित दर्जनों गांव का इसी मार्ग से आना जाना होता है | मनकापुर तहसील क्षेत्र के  दिनकरपुर गांव स्थित माई जी कुटी की पूजारिन सरस्वती भूलननंद जी उर्फ माई जी द्वारा मनवर नदी पर वर्ष  1931 में इस पुल का निर्माण कराया गया था | इसीलिए इस पुल को माई राम कुटी पुल के नाम से जाना गया| तब से यह पुल आज तक उसी अवस्था में पिलर पर  लकड़ी की बल्लियों के सहारे लोगों के आवागमन का सुगम मार्ग बना हुआ है |
समाज कल्याण मंत्री प्रतिनिधि वेद प्रकाश दुबे ने दूरभाष पर बताया कि उक्त पुल के लिए प्रस्ताव भेजा गया है |
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