ए. आर. उस्मानी
गोण्डा। सरकारी योजना के उदघाटन कार्यक्रम तथा इससे संबंधित लगाए जाने वाले शिलापट्ट में गोण्डा सांसद कीर्तिवर्धन सिंह उर्फ राजा भैया एक बार फिर गुटीय राजनीति के शिकार हो गए। मौका था जिला अस्पताल में केंद्र के निर्देशन और बजट से बनने वाले डायलिसिस यूनिट के उदघाटन का। यहां जो उदघाटन का शिलापट्ट लगाया गया है उसमें सांसद राजा भैया का नाम नहीं है। अब इसे प्रशासनिक चूक कहें, लापरवाही कहें या गुटीय राजनीति? जो भी हो, इन दिनों यह सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोगों द्वारा तमाम सवाल उठाए जा रहे हैं।
सांसद केंद्र सरकार का प्रतिनिधि होता है। जानकार बताते हैं कि किसी भी सरकारी कार्यक्रम, खासतौर से केन्द्र सरकार की योजना के अन्तर्गत आयोजित होने वाले समारोह में क्षेत्रीय सांसद को आमंत्रित करना आवश्यक होता है। लेकिन यहां भाजपा में चल रही गुटीय राजनीति से अधिकारी भी प्रभावित दिखाई दे रहे हैं। बुधवार को जिला अस्पताल में डायलिसिस यूनिट का उदघाटन सदर विधायक प्रतीक भूषण सिंह व जिलाधिकारी डॉक्टर नितिन बंसल द्वारा किया गया। सूत्र बताते हैं कि इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में गोण्डा के सांसद राजा भैया को आमंत्रित नहीं किया गया था। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग आमंत्रित करने की बात कह रहा है। अब सवाल यह उठता है कि क्या गोण्डा सांसद को केन्द्र सरकार के बजट से बनने वाले इस डायलिसिस यूनिट के उदघाटन अवसर पर ना बुलाया जाना जिला प्रशासन, अस्पताल प्रबंधन की चूक है या जान बूझकर उठाया गया कदम? सवाल यह भी उठाया जा रहा है कि कहीं इसके पीछे पार्टी के दो दिग्गजों के बीच चल रही खींचतान या गुटीय राजनीति तो नहीं है?
यहां यह भी बताते चलें कि जिला अस्पताल में डायलिसिस यूनिट के उदघाटन का जो शिलापट लगाया गया है, उसमें गोण्डा सांसद का कहीं नाम तक नहीं है। ज्ञातव्य हो कि इससे पहले भी मेहनौन विधानसभा में ऐसी ही घटना हो चुकी है। एक शिलापट पर वहां के विधायक विनय द्विवेदी और सांसद गोंडा का नाम नहीं लिखा गया था। तब यह मामला मीडिया में आने के बाद प्रशासन ने आनन फानन में शिलापट निकलवा कर दूसरा लगवाया था जिसमें सांसद कीर्तिवर्धन सिंह व विधायक विनय कुमार द्विवेदी का नाम लिखाया गया।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि सांसद का सम्मान और प्रोटोकॉल फॉलो ना करना उनके अधिकारों का हनन है। इस भूल अथवा गलती को तत्काल सुधारा जाना चाहिए तथा इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के विरूद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।


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