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शिशुओं को छह माह बाद दें सुपाच्‍य और मसला हुआ उपरी आहार


■ हरी पत्‍तेदार सब्‍जी के साथ ही पीले नारंगी फल के साथ ही गाजर भी दें
■ पोषण माह के दौरान उपरी आहार पर चर्चा, किया गया भोजन का प्रदर्शन

आलोक बर्नवाल
संतकबीरनगर। पोषण माह के दौरान बुधवार को जिले के विभिन्‍न आंगनबाड़ी केन्‍द्रों पर उपरी आहार के बारे में चर्चा की गई। गृह भ्रमण के दौरान उपरी आहार पुस्तिका का प्रदर्शन करते हुए 6 माह से उपरी आहार की शुरुआत का महत्‍व बताया गया। इस दौरान पोषण सखियों ने यह बताया कि शिशुओं को 6 माह के बाद सुपाच्‍य और मसला हुआ उपरी आहार दें, साथ ही हरी पत्‍तेदार सब्‍जी के साथ ही पीले नारंगी फल के साथ ही गाजर भी दें। ताकि शिशु का शारीरिक विकास होने के साथ ही साथ मानसिक विकास भी हो सके।
जिला कार्यक्रम अधिकारी सुश्री विजयश्री ने बताया कि 6 माह से उपरी आहार की शुरुआत के महत्‍व तथा उसके सही समय, गुणवत्‍ता, मात्रा तथा आवृत्ति पर आंगनबाड़ी केन्‍द्रों पर चर्चा हुई। सांथा और बघौली ब्‍लाक में पोषण रैली भी निकाली गई। हैसर ब्‍लाक के बेलौरा आंगनबाड़ी केन्‍द्र पर भी उपरी आहार पर विधिवत चर्चा की गई। सांथा ब्‍लाक में सुपरवाइजर मधु चतुर्वेदी ने बताया कि 6 से 12 माह के बच्चों के अभिभावकों को बुलाकर बच्चों के लिए 6 माह के बाद उपरी आहार की जरूरत के विषय में जानकारी दी गयी। 6 माह से 9 माह के शिशु को दिन भर में  200 ग्राम सुपाच्य मसला हुआ खाना, 9 से12 माह में 300 ग्राम मसला हुआ ठोस खाना , 12 से 24 माह में 500 ग्राम तक खाना खिलाने की हिदायत दी गयी। इसके अलावा अभिभावकों को बच्चों के दैनिक आहार में हरी पत्तीदार सब्जी और पीले नारंगी फल को शामिल करने की बात बताई गयी। बेलहर के सीडीपीओ अनुज ने बताया कि इस दौरान सेविका के द्वारा लाये गए खाने में शामिल चावल, रोटी, दाल, हरी सब्जी, अंडा एवं अन्य खाद्य पदार्थों की पोषक तत्वों के विषय में चर्चा कर अभिभावकों को इसके विषय में जागरूक किया गया। इस दौरान हाथ धोने का प्रदर्शन भी किया गया।  जिसमें बच्चों को खाना खिलाने से पूर्व साबुन से हाथ धुलने के विभिन्न चरणों का प्रदर्शन हुआ। सेविकाएं हाथ धोने के प्रदर्शन के बाद खाने को मसलकर एवं अर्धठोस आहार बना कर खिलाने का प्रदर्शन किया। साथ ही 7 माह एवं इससे बड़ी उम्र के ऐसे बच्चे जिनको खाने की आदत है उन्हें उनकी माताओं के साथ ही यू आकार में बिठाकर उन्हें खाने के लिए प्रेरित किया गया ताकि बड़े बच्चों को खाना खाते देखकर 6 माह के बच्चों में भी खाना खाने की इच्छा जागृत हो सके। इसके अलावा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने खाने की इच्छा के संकेतों को पहचानकर साफ़ हाथ या चम्मच से खाना खिलाने का प्रदर्शन भी किया।

छह महीने तक मां का दूध होता है एकमात्र आहार
सीएचसी खलीलाबाद की स्‍त्री रोग विशेषज्ञ डॉ सलोनी श्रीवास्‍तव बताती हैं कि मां के दूध को बच्चों के लिये सर्वश्रेष्ठ पोषण माना जाता है। शिशु के जन्म से 6 महीने तक उसका एकमात्र आहार होता है। अध्ययनों में खुलासा हुआ है कि जिन बच्चों को मां का दूध पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाता है, उनमें कान के संक्रमण, सांस लेने में परेशानी और डायरिया की समस्या देखने की मिलती है। मां के दूध से संबंधित फायदों के बावजूद कई भारतीय महिलायें शिशु के चार माह के होते-होते खुद-ब-खुद स्तनपान कराना छोड़ देती हैं। 6 महीने तक तो केवल मां का दूध ही बच्‍चे के लिए एकमात्र आहार होता है। 6 महीने से पहले अगर उपरी दूध पिलाया जाता है तो बच्‍चे के अन्‍दर संक्रमण की समस्‍या हो जाती है। 6 महीने तक ही नहीं, दो साल तक मां को स्‍तनपान कराना नहीं छोड़ना चाहिए।

क्या कहते है आकड़े
एनएफचएस- 4 ( 2015- 16 ) के आंकड़े बताते हैं कि संतकबीरनगर जनपद में 3 वर्ष से कम आयु के बच्‍चे जिन्‍होने जन्‍म के एक घण्‍टे के भीतर स्‍तनपान किया है उनकी संख्‍या 29.2 प्रतिशत है। 6 से 23 माह की उम्र तक के ऐसे बच्‍चे जिन्‍हें पर्याप्‍त मात्रा में पोषण मिलता है उनकी संख्‍या मात्र 7.8 प्रतिशत है। इसी के चलते 5 साल तक के बच्‍चों में 50.5 प्रतिशत ऐसे बच्‍चे हैं जिनकी उम्र के अनुसार लम्‍बाई नहीं बढ़ रही है, अर्थात बौनापन है। 10.9 प्रतिशत ऐसे बच्‍चे हैं जिनके अन्‍दर सूखापन है, जबकि 2.5 प्रतिशत बच्‍चों के अन्‍दर गंभीर सूखापन है। 36.5 प्रतिशत बच्‍चों की लम्‍बाई के हिसाब से उनका वजन कम है।

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