किसी ने कहा है कि ..
सिर्फ़ पंखों से कुछ नहीं होता ,हौसलों से उड़ान होती है।।
जी हां! इस संवेदनशील हालात का इलाज़ ये भी है कि मन से पराजय न स्वीकार की जाए।आशावादी बनें,धैर्यवान बनें ततपश्चात आत्मबल स्वयम इतना मज़बूत हो जाएगा कि आपका शरीर प्रतिरोधी क्षमता के लिए तैयार होने लगेगा।
हम पढ़ते आये हैं
हारिये न हिम्मत बिसारिये न राम
ये मनोभाव जिस मनोयोग से ऊर्जावान बनाने के लिए लिखे गए ये उन्हीं स्थितियां का एक वृहद प्रकार है।आपदकाल धैर्य परखने के लिए ही आते हैं और एक साहसी व्यक्ति दुस्साहस दिखाता हुआ बुद्धि,पराक्रम से विजय पा ही लेता है।
बुद्धिर्यस्य बलं तस्य
अर्थात जिसके पास बुद्धि है उसके पास बल है,संसाधन का संग्रह या भंडार होना ही जीत को सुनिश्चित नहीं करता।हम भारतीय आस्थावान लोग #राम ते अधिक राम कर दासा# तक अमिट विश्वास करते हैं सिर्फ़ राम ही नहीं। हम माननीय प्रधानमंत्री जी की उस छोटी -छोटी अपील को इसलिए महत्वपूर्ण बनाते हैं अपनी पहल से क्योंकि जहां काम आवै सुई काह करै तलवार।
प्राथमिक चिक्तिसा चूंकि नियंत्रण का पहला क़दम होती है हम सब लोग उसी का पालन कर रहे अलग-अलग तरीक़े अपनाकर ..वैदिक-ज्योतिष-वैज्ञानिक तथ्यों से जोड़कर शंखध्वनि की गई एक निश्चित मुहूर्त पर ,एकांत को प्राथमिकता दी गयी,आवागमन स्वतः से स्वतः से होकर सबके जीवन प्रश्न के समाधान में रोका गया विशेष परिस्थितियों को छोड़कर, स्वच्छता पर पुनः अति ध्यानाकर्षण पर इसलिए बल दिया गया कि जरूरी नहीं कि सामने वाला भी उतना ही स्वस्थ,स्वस्थ है।दौड़-भाग की जिंदगी में एक विराम आया जो वास्तव में सबको चाहिए था जरूरत हर शरीर को थी नवचेतन होने की।हम मानते आए हैं कि एक अदृश्य शक्ति तो है जो हम नहीं कर सकते वो कर देती है ,यक़ीनन फिर वही होगा आस्था जीतेगी,हमारी दृढ़ता की विजय होगी उस वायरस से हम लड़ेंगे,जीतेंगे जिसका आकर कण से भी छोटा है क्योंकि हमने सुई की जगह सुई ही उठायी है,हमने प्राथमिक उपचार समय रहते प्रारम्भ किया है,हमने औरों की तरह मुंह फैलाये 2 दिन पहले खांसी की प्रतीक्षा नहीं की बल्कि उपचार स्वरूप औषधि ,उपाय किये।ज्ञात हो कि चाइना में तीसरे या चौथे चरण के करोना संक्रमण के दौरान ही भारत में दूरदर्शिता के तहत मोदी जी द्वारा जनवरी माह में ही करोना के बचाव हेतु बोर्ड का गठन कर दिया गया था और तैयारियां वहीं से शुरू कर दी गयी थीं तो हमारा आंकड़ा आस्था और प्रयास के बलबूते पर यही कहता है कि इटली जैसे हालात कभी नहीं होंगे भारत में । भारत पुनः इस मैदान का अदम्य साहस का धनी योद्धा क़रार दिया जाएगा।"गायन्ति देव: किल गीतकानि धन्यास्तु ते भारत भूमि भागे"ये वही भारत है, वही रहेगा।।
हमने चर्चा की कि कण से छोटा है ये वायरस पर इतना बड़ा है कि माइक्रोस्कोप में देखा जा सकता है।वायरस सजीव और निर्जीव के बीच की कड़ी कहे जाते हैं और जीवित शरीर के बाहर निर्जीव की तरह बर्ताव करते हैं किंतु शरीर में पँहुचते ही सजीव हो उठते हैं। पहले
माइक्रोबियल इंफेक्शन जब भी होता था तो लोग अदृश्य शक्ति से ही जोड़ते थे।
वायरस के प्रकार ये भी:-
पोलियो ,मम्स,चेचक के संग रैबीज ,जुखाम हो जाते हैं,
एन्फ्लूएंजा, खसरा,एड्स आदि को वायरस फैलाते हैं ।।
मेडिकल साईंस कहता है कि प्राथमिक तौर पर वायरस का संक्रमण होने पर वायरस को ख़तम करने के लिए एंटीवायरस दवाएं देने के बजाय एन्टीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं,जो कि मुख्यतया बैक्टीरिया को ख़तम करती हैं।
सच तो ये है कि वायरस की स्थिति में आपका शरीर स्वयम एक डॉक्टर है बशर्ते उसकी प्रतिरोधक क्षमता अच्छी बना कर रखी जाए।
ज़ुखाम जो कि लगभग 200 प्रकार के अलग-अलग तरह के वायरस का सम्मिलित प्रभाव है,के लिए कहा जाता है कि यदि इसका इलाज़ किया जाए तो लगभग 7 दिन का समय लगता है और न किया जाए तो एक हफ़्ते मतलब बात बराबर अब आप कहेंगे कि चिकित्सा का मतलब कुछ न होगा ??? जी नहीं तात्कालिक परेशानियों से निज़ात अवश्य मिलती है किंतु बीमारी से ठीक होने का समय वही होता है ।
कुछ वायरस की ख़ास विशेषता में ये भी है कि यदि शुद्ध कल्चर के रूप में उन्हें डिब्बों में बंद करके रख दिया जाए और 10 वर्ष बाद भी उन्हें सजीव पर छिड़क दिया जाए तो पुनः सक्रिय हो सकते हैं।
ये दौर निश्चित रूप से भयाक्रांत कर रहा ,समूचे जनमानस को झकझोर रहा किसी अनहोनी के भय से किन्तु यही वो अवसर है जब बरती गई सावधानी,स्वयं से लिये गए कुछ प्रण, अपनों का साथ निभाने की शपथ,परपीड़ा के समाधान की आस्था,ईश्वर को साक्षी मानकर किये गये सत्कर्म,बूढ़ो-बड़ों-बच्चों को प्राथमिकता देकर आप लंबे संघर्ष के जीवट योद्धा साबित हो सकते हैं क्योंकि आपकी जीत इतने के बाद निश्चित रूप से शानदार होगी ।भारत विश्वगुरु था ,है,रहेगा।हम भारतीय इतिहास लिखते हैं,पढ़ते कम हैं।
!! जय हिंद जय भारत!!!
डॉ मानसी द्विवेदी
कवयित्री, मंच संचालिका,शिक्षाविद,स्वतंत्र स्तम्भकार


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