कोई तो साज हैं तुममें , जो तुम बस ख़्वाबों में मिलते हो ।।
कभी गीतों,कभी गजलों,कभी चुप्पी में मिलते हो ।
कोई स्वाति की बूंदें हो क्या, जो सिर्फ तड़पन में मिलते हो ।।
कभी कमरे ,कभी खिड़की, कभी दीवारों पर दिखते हो
कोई साया हो क्या तुम जो, मेरे संग– संग भटकते हो ।।
कभी बातों ही बातों में,कभी महफ़िल औ मदिरा में
मोहब्बत अब भी हैं क्या,जो बस तनहाई में मिलते हो ।।"
रेशमा त्रिपाठी
प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश


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