इमरान अहमद
कसमें,वादे,प्यार,वफा सब बातें हैं,बातों का क्या!1967 में आई फिल्म ‘उपकार’ का यह गीत भले ही पुराना पड़ चुका है,लेकिन जब चुनावों में नेताओं के वादों व वादाखिलाफियों के चर्चे आम होते हैं तो इसे मजे लेकर गाया और गुनगुनाया जाता है।विधानसभा चुनाव की तारीख नजदीक आ गयी है,ऐसे में नेता जनता को रिझाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहें हैं।
यहां नेता चुनाव जीतने के लिए हर साल बड़े बड़े वादे,इरादे और झूठी कसमें खाते हैं।मगर हर बार विकास वादों इरादों और कसमों के बोझ तले दब कर रह जाता है।
चुनाव के पहले और बाद में जनता से नेता के बोल
सड़क पक्की करा दूंगा,कहा होगा,काम नक्की करा दूंगा,कहा होगा!अब नशे की बात का एतबार भी क्या? इलेक्शन के नशे में था कहा होगा!
हम बात कर रहें हैं गोंडा ज़िले के सुरक्षित विधानसभा मनकापुर की जहाँ लाखों की आबादी वाले नगर पंचायत क्षेत्र सहित ग्रामीण इलाकों को सजने संवारने के लिए नेता लाखों वादे करते हैं इरादे जताते हैं।
लेकिन हकीकत में लोगों को मिलता कुछ नहीं।मनकापुर नगर पंचायत क्षेत्र में विकास का पहिया आज भी वादों और इरादों के बीच फंसा है।
यहां सरकारें आती हैं,चली जाती हैं।मगर अगर कुछ पूरी नहीं होती हैं,तो वो हैं लोगों की उम्मीदें।यहां का सबसे अहम मुद्दा रोज़गार के साधन,बस स्टाप,रेलवे ओवर ब्रिज,बेहतर शिक्षा-स्वास्थ्य व बंद होने की कगार पर पहुंच चुकी आईटीआई को फ़िर से चालू करने का है।
यहां जब-जब भी चुनावी बिगुल बजता है,सभी दलों के नेता क्षेत्र में विकास करने का बेशुमार वादा करते हैं।मगर चुनाव जीतने के बाद जनप्रतिनिधि उन वादों इरादों और अपनी खाई कसमों को भूल जाते हैं।
यहां हर पाँच साल पर नेता जब भी वोट माँगने आते हैं जनता से सबसे पहले मनकापुर के गुमटी तिराहे पर बनी रेलवे क्रासिंग पर ओवर ब्रिज बनवाने की बात करते हैं ताकी लोगों को जाम से छुटकारा मिल जाए,मगर चुनाव खत्म होते ही अपने वादे भूल जाते हैं।
यहां पटरियों पर फैले अतिक्रमण खत्म करवाने का आश्वासन भी झूले पर झूल रहा है।बात अगर स्वास्थ सेवाओं कि की जाए तो नगर पंचायत की लाखों के आबादी पर एक सरकारी अस्पताल तो है मगर वहां इलाज के बेहतरीन सुविधाएं आज भी मौजूद नहीं हैं।
वहीं शिक्षा के नाम पर कई स्कूल,कालेज के नाम दर्ज है मगर ना तो बेहतर सुविधा है ना ही कोई होस्टल,जहां बच्चे रह कर के अच्छी शिक्षा हासिल कर सकें।
यहां पर कोई भी बस स्टैंड ना होने से भी विकास का पहिया थमा हुआ है,वहीं क्षेत्र में बने इंडियन टेलीफोन इंडस्ट्रीज (आईटीआई)पर जनप्रतिनिधियों के नज़रअंदाज़ी के चलते मनकापुर की पहचान फीकी पड़ रही है।
साल-दर-साल बीतता रहा और विधानसभा चुनाव आ गए।नेता फ़िर निकल पड़े है जनता को समझाने रिझाने।
यहां इस बार पांचवे चरण में 27 फरवरी को वोट डाले जाने हैं।जहां भाजपा से रमापति शास्त्री,कांग्रेस से संतोष कुमारी,सपा से रमेश चंद गौतम, बीएसपी से श्याम नारायण कोरी मैदान में हैं,और अपनी किस्मत आज़मा रहें हैं।
मनकापुर विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है।यहां पर कुल लगभग 3 लाख 31 हजार 350 मतदाता हैं।जिसमें 177458 पुरुष व 153965 महिलाएं शामिल हैं।
जनता ने कब किसके सर बाँधा जीत का सेहरा
•1952 राघवेंद्र प्रताप सिंह,कांग्रेस
•1957 राघवेंद्र प्रताप सिंह,निर्दलीय
•1962 राघवेंद्र प्रताप सिंह,स्वतंत्र पार्टी
•1967 कुँवर आनंद सिंह,कांग्रेस
•1969 कुँवर आनंद सिंह,कांग्रेस
•1974 राम गरीब,कांग्रेस
•1977 गंगा प्रसाद,कांग्रेस
•1980 छेदी लाल,कांग्रेस
•1985 राम विशुन आजाद,कांग्रेस
•1989 राम विशुन आजाद,कांग्रेस
•1991 छेदी लाल,भाजपा
•1993 राम विशुन आजाद,कांग्रेस
•1996 राम विशुन आजाद,सपा
•2002 राम विशुन आजाद,सपा
•2007 राम विशुन आजाद,सपा
•2012 बाबू लाल,सपा
•2017 रमापति शास्त्री,भाजपा

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