रमेश कुमार मिश्र
गोण्डा।विधानसभा चुनाव 2022के महासग्राम में विकास पर उम्मीद की सवारी भारी पड़ती दिखाई दे रही है।
बीते पंचायत चुनाव का मुद्दा भी हावी दिखाई दे रहा है ,कारण हारे पंचायत चुनाव के उम्मीदवार कही ना कही सत्तापक्ष को दोषी मानते हुए उम्मीद की सवारी पर बैठे दिखाई दे रहे है। जिससे चुनाव दिलचस्प होता जा रहा है।
यही नही गोण्डा जिले की सातो विधानसभा में उम्मीद भारी दिखाई दे रही है, जिसका कारण कही ना कही जनप्रतिनिधियों की उदासीनता व जनता से किए वादे पूरे न होने से है।
बताते चले की गोण्डा जिले की सात विधानसभा के हर एक विधानसभा क्षेत्र में उम्मीद की सवारी तेज रप्तार से दौड़ रही है और विकास का पहिया कमजोर दिखाई पड़ रहा है।
जिसका कारण भी साफ है की किसानो की आय दुगनी करने का झाँसा देकर लागत भी खत्म करदी गयी और छुट्टा जानवरो ने विकास के पहिये पर ब्रेक लगा दी।
वही पंचायत चुनाव में हार का सामना करने वाले प्रत्याशी कही ना कही सत्तापक्ष को दोषी मानते हुए उम्मीद की सवारी पर बैठे दिखाई पड़ रहे है।
जनप्रतिनिधियों की उदासीनता व जनता से किया वादा पूरा ना होना भी इसका कारण बना हुआ है। जिसका फायदा भी उम्मीद की तरफ झुकाव बनाये हुए है।
विकास का पहिया ब्रेकडाउन में जाता दिखाई पड़ रहा है।जिसकी गूँज आलाकमान को भी सुनाई पड़ रही है और चुनाव दिलचस्प होता जा रहा है।
प्रत्याशी एढ़ी से चोटी तक का जोर लगाते दिख रहे है, पूरे क्षेत्र गाँव गली मोहल्ले तक लोग बराबर पहुँच रहे है। घर घर जाकर लोगो से हाथ जोड़ रहे है।
हर तरफ विकास की ही बात होरही है जनता जनार्दन को समझाया जा रहा है, फिर भी कही ना कही विकास का पहिया उम्मीद से पीछे चल रहा है।
जनता की खामोशी भी इसका कारण बनी हुई है।किसान छुट्टा जानवर के आंतक से सहमे हुए है, जनता अपनो से सहमी हुई है और उम्मीद को इसका फायदा मिलता दिखाई देरहा है।
यही नही इस चुनाव में सबसे बड़ा फैक्टर जो निकलकर सामने आरहा है वो है किसानो की समस्या व पंचायत चुनाव ये दोनो समस्याओं का हल किसी के पास नही है।
जिससे दोनो समस्याएं हावी होर ही है और चुनाव दिलचस्प मोड़ की तरफ अग्रसर है और कुछ नया करने के लिए उत्तेजित है।
चुनाव पंडितों की माने तो 60-40का आकड़ा पहुँच रहा है, वही सर्वे रिर्पोट भी यही दिखा रही है या यो कहे की कही ना कही विकास पर उम्मीद भारी पड़ती दिखाई पड़ रही है पूरे गोण्डा जिले की सातो विधानसभा में।

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