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बलरामपुर:दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन



अखिलेश्वर तिवारी 

 जनपद बलरामपुर जिला मुख्यालय के एमएलकेपीजी कॉलेज सभागार में चल रहे दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन रविवार को किया गया ।समापन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में जेपी विश्वविद्यालय मध्य प्रदेश के प्रोफेसर राजेश ईनायक मौजूद रहे।


       एमएलके पीजी कॉलेज में चल रहे दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का समापन मुख्य अतिथि जयप्रकाश नारायण विश्वविद्यालय मध्य प्रदेश के प्रोफेसर राजेश नायक की मौजूदगी में 26 फरवरी को किया गया । इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स एवं रिसर्च एथिक्स विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश के कई विश्वविद्यालयों के अनेक विद्वानों ने प्रतिभाग किया तथा कान्फ्रेंस के मुख्य विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला । प्रमुख वक्ताओं में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर मनमोहन कृष्ण, डॉ राजीव तिवारी पेटेंट अधिकारी भारत सरकार, प्रोफेसर अश्वनी मिश्रा क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी गोरखपुर, डॉक्टर रंजन बसक रसायन शास्त्र विभाग किसान पीजी कॉलेज बस्ती, डॉ प्रशांत शुक्ला उत्तराखंड, डॉक्टर अरुण कुमार मौर्य गाजियाबाद व डॉक्टर राजेश नायक प्रमुख वक्ताओं में शामिल रहे । कान्फ्रेंस में प्रोफेसर रीना सैनी अंबाला सहित जबलपुर, इलाहाबाद, कानपुर, जयपुर, रायपुर सहित अन्य कई स्थानों से अनेक विद्वानों ने व्याख्यान ऑनलाइन प्रस्तुत किया । कान्फ्रेंस के कोऑर्डिनेटर प्रोफेसर तबस्सुम फरकी ने बताया कि इसमें लगभग 600 प्रतिभागियों ने देश के अनेक हिस्सों से प्रतिभाग किया एवं लगभग 50 प्रतिभागियों ने अपने अपने शोध पत्रों को ऑनलाइन व ऑफलाइन माध्यम से प्रस्तुत किया । कान्फ्रेंस के संयोजक डॉ सद्गुरु प्रकाश ने कान्फ्रेंस प्रोसीडिंग छपवाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान प्रदान किया । इस कान्फ्रेंस में मुख्य वक्ता व विषय विशेषज्ञ प्रोफ़ेसर मनमोहन कृष्णा ने बताया कि पेटेंट किसी देश द्वारा किसी खोजकर्ता को या उसके द्वारा नामित व्यक्ति को उसके अनुसंधान को सार्वजनिक करने के बदले दिए जाने वाले अनन्य अधिकारों के समूह को कहते हैं । इसे एक निश्चित समय के लिए दिया जाता है । इसी प्रकार कॉपीराइट में किसी व्यक्ति का कोई मौलिक काम सीडी, डीवीडी या एफडी कार्ड वगैरह में सुरक्षित हो तो उस व्यक्ति को अपने आप ही उस काम का कॉपीराइट मिल जाता है । अन्य वक्ताओं ने रिसर्च एथिक्स के बारे में बताया कि शोध में नैतिकता के नियमों का सदैव पालन करना चाहिए व ईमानदारी पूर्वक सदैव अपनी सोच को प्रस्तुत करना चाहिए । दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार के सफल आयोजन पर महाविद्यालय प्राचार्य प्रोफेसर जेपी पांडे ने प्रसन्नता व्यक्त की व इसके सफल आयोजन में सहयोग हेतु महाविद्यालय के समस्त शिक्षकों का आभार व्यक्त किया ।

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