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दो हजार के नोट वापस लेने का मोदी सरकार का फैसला तुगलकी फरमान:प्रमोद तिवारी



कुलदीप तिवारी 

लालगंज, प्रतापगढ़। राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी ने मोदी सरकार द्वारा दो हजार के नोट बंद करने के फैसले को तुगलकी फरमान ठहराते हुए देश की अर्थव्यवस्था फिर दांव पर लगाने पर अविवेकपूर्ण फैसला कहा है। 



उन्होनें प्रधानमंत्री के फैसले पर तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि छः साल छः माह मे ही मोदी सरकार ने आखिर क्यों 2016 के अपने फैसले को पलटते हुए अपने ही कार्यकाल में जारी की गयी दो हजार रूपये की नोट वापस ले लिया।



 लालगंज में पार्टी के एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे प्रमोद तिवारी ने मीडिया से रूबरू होते हुए यह भी तंज कसा कि मोदी सरकार ने यानी यह मान लिया है कि नवंबर 2016 का उसका निर्णय गलत था या फिर आज उसका निर्णय गलत है। 



सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि सरकार के इस फैसले से एक बार फिर देश में आर्थिक अनिश्चितता का दौर शुरू हो गया है। उन्होनें प्रबल आशंका जतायी कि देश में पूंजी निवेश खतरे मे पड़ जाएंगे तो जिस किसी ने उद्योग व्यापार अथवा निवेश के लिए योजना बनाई होगी वह अनिश्चित भविष्य का शिकार हो गया है। 



तिवारी ने कहा कि छः साल छः माह मे ही मोदी सरकार का आर्थिक नीति से जुडा फैसला पूरी तरह से गलत साबित हो गया है। उन्होनें सवाल उठाया कि खुद के ही निर्णय को गलत साबित होने पर क्या प्रधानमंत्री नैतिकता के आधार पर अब पूरे देश से क्षमा याचना करेंगे। उन्होनें कहा कि पीएम मोदी ने ताल ठोंकी थी और जुमला बोला था कि नोटबंदी से ब्लैकमनी बाहर निकल आयेगी। 



श्री तिवारी ने कहा कि इसके विपरीत जब 99.26 प्रतिशत से अधिक धनराशि बैंको मे डिपाजिट हो गयी तो स्पष्ट हो गया कि देश मे काला धन नही है। राज्यसभा मे विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी ने यह भी हमला बोला कि यदि काला धन मौजूद रहा तो उसे सरकार एवं बैंक तथा बिचौलियों के गठबंधन से ब्लैकमनी से व्हाइट मनी बना ली गयी। 



उन्होनें चुटकी कसी कि गयासुददीन तुगलक शाह ने दिल्ली से अपनी राजधानी तुगलकाबाद लाये और जब आर्थिक और प्रशासनिक तबाही शुरू हुई तो अपनी राजधानी दक्षिण के दौलताबाद में स्थानांतरित किया। 



उन्होनें कहा कि फिर भी जनसाधारण की समस्याएं गंभीर बनी रही तो तुगलक ने राजधानी दिल्ली वापस लौटा ली। उन्होनें कहा कि तुगलक ने उस दौर मे सोने एवं चांदी के सिक्के को बंद करके तांबा का सिक्का चलाया। 



किन्तु बाद में उसे तांबा का सिक्का बंद करना पड़ा। ऐसे मे बकौल प्रमोद तिवारी मोदी सरकार ने एक बार फिर देश का इतिहास दोहराते हुए तुगलकी फैसले से देश की अर्थव्यवस्था को तबाह और बर्बाद करने की ओर धकेलने मे जुटी है। 



उन्होने कहा कि सरकार अर्थव्यवस्था को शुरू से ही भटकाव देती दिख रही है। प्रमोद तिवारी ने कहा कि मोदी सरकार ने नवंबर,  2016 मे उस समय के एक हजार और पांच सौ के नोट बंद करके आरबीआई एक्ट के तहत दो हजार के नोट जारी किये थे। 



श्री तिवारी ने पीएम मोदी पर देश की अर्थव्यवस्था न संभाल पाने के तीखे हमले के साथ उन्हंे अर्थव्यवस्था को अंधेरी गुफा से निकालने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह से उपाय पूछने की भी सलाह दी।



 प्रमोद तिवारी ने कहा कि लगता है कर्नाटक चुनाव परिणाम से पीएम मोदी इतना क्षुब्ध हो गये हैं कि वह दिशाहीन सरकार की तरफ से देश की अर्थव्यवस्था तक को दांव पर लगाने का जोखिम उठा रहे हैं। उन्होनें यह भी तंज कसा कि दो हजार की नोट वापस लेने के फैसले के समय देश अगर पीएम से स्थिति साफ करने की मंशा रखे भी तो प्रधानमंत्री देश मे न होकर जापान मे हैं। 



प्रमोद तिवारी ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था को बर्बादी मे डालकर प्रधानमंत्री का जापान पहुंचना भी अत्यन्त दुखदायी है।

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