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अनोखी शादी हुई सम्पन्न, जिसके गवाह बने क्षेत्र के लोग, पूरी कहानी जानकर हो जायेगे हैरान,यह किस्सा कहानी नही,बल्कि सत्य है


                                  शादी की एक झलक


 रमेश कुमार मिश्र

तरबगंज गोण्डा।तरबगंज थानाक्षेत्र के ग्राम पंचायत धौरहराघाट में एक ऐसी अनोखी शादी हुई है, जिसके गवाह पूरे क्षेत्र के लोग बने है । पूरे रीति-रिवाज के साथ शादी सम्पन्न हुई है। जिसकी हकीकत जानकर आपको भी हैरानी होगी। 

बताते चले की तरबगंज थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत धौरहराघाट के मजरा झामपुरवा में एक अनोखी शादी हुई है। जो पूरे रीति-रिवाज के साथ सम्पन्न की गई है ।जिसके गवाह पूरे क्षेत्र के लोग बने है। 

बता दे कि इस शादी का कार्यक्रम बकायदा पूरे रीति-रिवाज के साथ शुरू की गई। जिसमे घराती व बराती एक ही गाँव के लोग रहे है। पूरे क्षेत्र में निमंत्रण भेजा गया, शादी की तारीख 23 नवंबर को रखी गई । जैसे आम लोगो के शादी में व्यवस्था होती है, उसी तरह से सभी लोगो के लिए खान-पान की व्यवस्था की गई। डीजे बाजे के साथ बरात गाँव में पहुँची। जहाँ दूल्हे के रूप में कूप (कुवां) नजर आया और दुल्हन के रूप में बाटिका रही। कूप और बाटिका की शादी गाँव में पूरे रीति-रिवाज के साथ गुरुवार को सम्पन्न हुई। शादी में कूप के तरफ से पं राजकुमार शास्त्री ने योगदान किया। वही वधू बाटिका की तरफ से कमलेश कुमार मिश्र परिवार के साथ उपस्थित रहे। जिसमे बडढ़ारा से लेकर द्वारपूजा व कन्यादान तक के सभी कार्य किए गए। वही सभी बरातियों का खान-पान के साथ सम्मान भी किया गया। शादी को देखने के लिए क्षेत्र से काफी संख्या में लोग उपस्थित रहे । इस अनोखी शादी को देखने काफी दूर से भी लोग आये थे। वही ये अनोखी शादी क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।

वही वर पक्ष (कूप) की तरफ से योगदान कर रहे पं.राजकुमार शास्त्री ने बताया की कूप व बाटिका की शादी हो जाने से गाँव के लोगो को काफी आसानी होगी। किसी के घर शादी होगी तो वो आराम से दूल्हे को कूप का परिक्रमा करवा सकेगा। साथ साथ बाटिका की परिक्रमा हो जायेगी। इसलिए ये शादी करवाना जरूरी हो गया था, क्योकि पहले जिस कूप से दूल्हे को घुमाया जाता था, वो रखरखाव ना होने से बन्द हो गया था। दूसरी बात जिस घर पर वो कूप है, उस घर से निकलने का कोई रास्ता भी नही बचा था। जिससे ये जरूरी हो गया था कि दूसरे कूप को सुरक्षित किया जाय।इसी को लेकर इस कूप व बाटिका की शादी की गई है। सबसे बड़ी बात ये है कि ये कूप व बाटिका काली जी के स्थान परिसर पर ही है। जिससे कूप बाटिका के साथ कालीजी की परिक्रमा भी साथ साथ सम्पन्न हो जायेगी।

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