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BALRAMPUR...आधुनिक युग की महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बनी हर्ष गुलाटी


अखिलेश्वर तिवारी 
जनपद बलरामपुर जिला मुख्यालय सहित गोण्डा एवं दिल्ली तक कपड़ा व्यवसाय में अपना अमिट छाप छोड़ने वाले जीसीएस ग्रुप की संरक्षिका हर्ष गुलाटी आधुनिक युग की महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी है । 1940 में पाकिस्तान में जन्मी हर्ष गुलाटी ने भारत पहुंचकर अपने पति दर्शन लाल गुलाटी के साथ मिलकर देश सेवा तथा समाज सेवा की मिशाल पेश किया। गरीबों की सहायता तथा सेवा करना उनके स्वभाव में रहा । उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जैसे छोटे शहर से गुलाटी क्लॉथ स्टोर के रूप में शुरू हुआ कपड़ा व्यवसाय गुलाटी क्लॉथ स्टोर के नाम से एक बड़ा ब्रांड बन गया, जो नवभारत प्लाजा होते हुए जीसीएस समूह के रूप में गोण्डा और दिल्ली तक फैल चुका है  । उन्होंने कड़े संघर्ष, मेहनत एवं लगन के बलबूते एक बड़ी इमारत परिवार एवं संपत्ति के रूप में खड़ा किया है, जो इस युग की लड़कियों तथा महिलाओं के लिए मिशाल बनेगा ।

            हर्ष गुलाटी के बड़े पुत्र संजीव गुलाटी ने बताया कि उनकी मां 7 वर्ष की आयु में भारत पाकिस्तान विभाजन के दौरान पाकिस्तान से भारत आई थीं । उन्होंने कहा कि हमारी प्यारी मां आधुनिक समय की अनसुनी नायिका कही जा सकती हैं । माँ के लिए कुछ भी लिखना हमारे लिए सूरज को दिया दिखाने जैसा है। एक समर्पित पत्नी, एक पवित्र आत्मा, और अपने घर का हृदय, जिन्होंने अपने पति दर्शन लाल गुलाटी के साथ 71 अमूल्य वर्ष प्रेम और अटूट समर्पण में बिताए। आज के इस भौतिकवादी युग में, जहां रिश्ते कुछ दिनों से अधिक नहीं टिकते, जहां हर चीज़ का मूल्य एक टैग से आंका जाता है, जहां सुविधाएं और भौतिक लाभ प्राथमिक हो गए हैं, और समझ व प्रतिबद्धता का अभाव है । ऐसे में उनका 71 वर्षों का वैवाहिक जीवन धैर्य, आस्था और अटूट प्रेम का एक जीवंत उदाहरण है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक दुर्लभ और सुंदर प्रेरणा स्रोत है। सात वर्ष की कोमल आयु में वे 1947 के विभाजन के अशांत समय में भारत आईं। बचपन की सारी सुख सुविधाएं इतिहास की उस विभीषिका में पीछे छूट गईं। उसके बाद का जीवन साहस, धैर्य और अदम्य शक्ति से गढ़ा गया। उनका बचपन आसान नहीं था। फिर भी उस पीढ़ी की तरह उन्होंने हर कठिनाई का सामना दृढ़ निश्चय और आत्मबल से किया। उन दिनों का दर्द अक्सर इन पंक्तियों में झलकता था—
“जब-जब लम्हों ने खता की है, सदियों ने सज़ा पाई है।” विवाह के पश्चात हर्ष गुलाटी अपने पति दर्शन लाल गुलाटी के हर निर्णय के पीछे प्रेरक शक्ति और मार्गदर्शक बनी रहीं। दूरदर्शिता, गरिमा और समर्पण के साथ उन्होंने मिलकर सम्मान और उद्देश्य से भरा जीवन निर्मित किया। उन्होंने रोटरी इंटरनेशनल से संबद्ध इनर व्हील क्लब की अध्यक्षा रहते हुए समाज सेवा में सक्रिय योगदान दिया। एक सफल एवं समर्पित होम्योपैथी चिकित्सक के रूप में उन्होंने असंख्य जरूरतमंदों को निःशुल्क दवाइयां देकर सेवा और उपचार प्रदान किया। गरीबों की सेवा और उनकी मदद करना श्रीमती गुलाटी ओके स्वभाव में आ चुका था । अपने परिश्रम, ईमानदारी और सेवा भाव से उन्होंने “गुलाटी” नाम को एक ऐसी विरासत बना दिया, जो बलरामपुर और आसपास के जिलों सहित देश की राजधानी दिल्ली तक विश्वास और सम्मान का पर्याय बन गया।

पाकिस्तान से भारत तक का सफर 

हर्ष गुलाटी की प्रेम कहानी तब शुरू हुई जब वह केवल 14 वर्ष की थीं,
तब वह नसीराबाद से बलरामपुर पांच पांच ट्रेन बदल कर अपने सपनो के राजकुमार से मिलने आई, जिनसे वह पहले कभी नहीं मिली थीं, उनसे जन्म जन्मांतर का संबंध हो गया । उन्होंने अपने पीछे प्रेम की एक विरासत छोड़ी, अपने पति के साथ बिताए 71 वर्षों की अमूल्य धरोहर के रूप में टीटू-रेणु, नीतू-अर्चना, पूनम -सुरेश, अनू -नवीन, आकाश -आकृति, हर्षित -श्रेया, सलोनी, इलु, अंश आर्या, अवी एवं सबकी लाडली दियारा तीन पीढ़ी के रूप में संजोया और संवारा । उन्होंने यह सिद्ध किया कि सच्चा साथ जीवन का सबसे बड़ा आशीर्वाद है। उनका जीवन साहस, सेवा और अटूट प्रेम की एक अमर गाथा है, जो आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेगी ।

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