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पुण्यतिथि पर याद किए गए भारत रत्न बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर



आनंद गुप्ता 

महराजगंज:विद्या भारती विद्यालय स्वदेश सरस्वती विद्या मन्दिर इण्टर कॉलेज  महराजगञ्ज में आज भारत रत्न बोधिसत्व बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर की पुण्य तिथि पर वन्दना सभा में भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। बाबा साहब के चित्र पर वरिष्ठ आचार्य श्रीमान कल्याण सिंह, रामानंद जी, राकेश जी, अमित जी आदित्य मौर्य एवं प्रधानाचार्य जी ने पुष्पार्चन किया। 

अपने सम्बोधन में प्रधानाचार्य वीरेन्द्र वर्मा  ने बताया कि डॉ भीमराव अम्बेडकर बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के थे। उन्होंने कानून की शिक्षा प्राप्त की इस सनातन राष्ट्र के विधि एवं न्याय मन्त्री भी रहे। ये अपने माता पिता की चौदह सन्तानों में सबसे छोटे थे। इन्होंने दो विवाह करके रमा बाई अम्बेडकर एवं सविता अम्बेडकर जी को अपना जीवन साथी बनाया। जातीय कुप्रथा का शिकार होने के कारण उन्होंने 10 ऑक्टूबर 1954 में यह उद्घोष किया कि मैं हिन्दू और सनातन धर्म में जन्मा तो हूं परन्तु मुझे लगता है कि मेरा अन्त इस धर्म में नहीं होगा। इस उद्घोषणा के दो वर्ष तक किसी सनातनी ने इनकी आशानुरूप इनसे सम्पर्क नहीं किया। लेकिन कई अन्य धर्म के अनुयायियों ने बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर जी से सम्पर्क साधा और अपने-अपने धर्म में धर्मांतरित करने के लिए प्रयास प्रारम्भ किए, लेकिन उन्होंने कहा कि मैं राष्ट्रीय विचार धारा और अपनी सनातनी धार्मिक प्रेरणा से अभिभूत हूं इसमें अनेक अच्छाइयों के बावजूद मुझे कुछ एक रुढियाँ जैसे जातिवादी प्रथा और ऊँच नीच का भाव मुझे बिचलित करता है। इसलिए मैं इसी परम्परा के किसी सात्विक प्रवाह का हिस्सा बनूँगा, मैं कभी भी किसी अन्य धर्म का अनुसरण नहीं कर सकता। मैं केवल इसी धर्म की किसी साधना शाखा में अपनी दीक्षा ग्रहण करूंगा। अन्ततः उन्होंने 14 अक्टूबर 1956 को नागपुर में दीक्षा ली और दो माह से कम समय में ही उनकी मृत्यु 6 दिसंबर 1956 को हो गई। मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि उसे समय तत्कालीन अग्रेसर की पंक्ति में खड़े लोगों ने अगर इस हालात का आंकलन कर अपने मन से उचित अनुभूति की होती तो शायद कभी भीमराव अम्बेडकर ने भी धर्म परिवर्तन करके बौद्ध धर्म की दीक्षा न ली होती। इसका भारतवर्ष की प्रगति पर एक बहुत बड़ा प्रभाव पड़ा है। आज हम सभी ऐसे संविधान निर्माता भारत रत्न बोधिसत्व बाबा भीमराव अम्बेडकर जी के जीवन पर विचार करते हुए अपनी संवेदना अर्पित करते हैं, उन्होंने भारत राष्ट्र को सञ्चालित करने के लिए एक श्रेष्ठ विधान संविधान के निर्माण में प्रमुख भूमिका निभाई। बाबा साहब संविधान लेखन के लिए गठित प्राकलन समिति के अध्यक्ष थे। उनके परिनिर्वाण दिवस पर स्वदेश सरस्वती विद्या मन्दिर परिवार उनको विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता है। कार्यक्रम का संचालन आचार्य आदित्य जी ने किया।

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