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कप्तान साहब! मोतीगंज में बहुत महंगा है न्याय, एनसीआर दर्ज करने का पुलिस लेती है 10 हजार


ए.आर.उस्मानी
गोण्डा। सूबे की ध्वस्त कानून व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ लाख कोशिशें कर लें, लेकिन बिगड़ैल और बेलगाम पुलिसकर्मी सुधरने वाले नहीं हैं। मुख्यमंत्री की सख्ती और चेतावनी के बाद भी थानों पर बगैर रूपये के न्याय मिलना मुश्किल है। ऐसा ही एक मामला जिले के मोतीगंज थाने का है, जिसमें पीड़ित महिला का एनसीआर दर्ज कराने के नाम पर हल्के के दो सिपाहियों ने पांच - पांच हजार रुपये ले लिए। इतना ही नहीं, आरोप है कि सिपाहियों ने दूसरे पक्ष से भी रूपये ऐंठे और सीआरपीसी की धारा 151 के तहत कार्रवाई करके मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। पीड़ित महिला अब भी न्याय की तलाश में दर दर भटक रही है, लेकिन उसकी फरियाद सुनने वाला कोई नहीं है !
    जिले के मोतीगंज थाने की पुलिस इन दिनों पूरी  तरह बेलगाम हो चुकी है। उसेे शासन के निर्देशों से शायद कोई सरोकार नहीं है ! कानून को अपनी जागीर समझने वाले एस.ओ. एक तरफ जहाँ थाने की  चहारदीवारी में क़ैद रहकर आराम फरमाते रहते हैं,  वहीं दूसरी ओर हल्के के बिगड़ैल और बेलगाम  सिपाही पीड़ितों से रुपये ऐंठने का घृणित खेल खेल रहे हैं। वैसे तो योगी सरकार का समस्त थानों के लिए सख्त निर्देश है कि पीड़ितों की दुश्वारियां न बढ़ाकर उनके साथ त्वरित न्याय किया जाए, खासतौर से महिलाओं से सम्बंधित मामलों में त्वरित एवं सख्त कार्रवाई की जाए, लेकिन यहां उल्टी गंगा बह रही है।  रूपये की लालच में पुलिस सीएम के हुक्म को भी ठेंगा दिखा रही है। वह भी डंके की चोट पर। इसका ताजा उदाहरण मोतीगंज थाना क्षेत्र के बेसहूपुर गांव की निवासिनी पंकज लता हैं। उसने बताया कि 1 सितंबर को डाँठ काटने को लेकर गांव के दबंग गिरीश चंद्र चौबे व उसकी पत्नी ललिता से मामूली कहासुनी हो गई। आरोप है कि विपक्षी गिरीश व उसकी पत्नी ने पंकज लता के सिर पर लाठी से जोरदार प्रहार कर दिया,  जिससे उसके सिर पर गंभीर चोटें आयीं और वह मौके पर ही बेहोश होकर गिर गयी। पीड़िता ने बताया कि उसके सिर पर पहले से ही टाँके लगे हुए थे। आरोपी द्वारा उसी पर वार करने से टाँके पक गए। पीड़िता का आरोप है कि उसने जब थाने पर तहरीर दी तो हल्का सिपाही सुनील यादव व विनय राय ने मुकदमा दर्ज कराकर ठोस कार्रवाई कराने के नाम पर उससे पांच - पांच रूपये लिए। रूपये लेने के बाद भी महिला का महज एनसीआर दर्ज किया गया, जबकि उसके सिर पर गंभीर चोटें आईं हैं। पीड़िता का आरोप है कि हल्का सिपाही आरोपी के हिमायती बनकर उसी के साथ बैठकर चाय नाश्ता करते हैं, क्योंकि सिपाहियों ने उससे भी रूपये ले रखे हैं। पीड़िता ने जब सिपाहियों से कहा कि साहब क्या हमें न्याय नहीं मिलेगा ? इस पर कानून को ताक पर रखने वाले बेखौफ सिपाही ने कहा कि आरोपी ने कौन सा बड़ा जुल्म किया है ? क्या उसे फांसी पर चढ़ा दें ?  यहाँ सवाल यह उठता है कि क्या भारी जुल्म करने वाले ही सजा के हकदार हैं ? और अगर वही हकदार हैं तो फिर पीड़िता से इन  बेलगाम सिपाहियों ने 10 हजार रूपये क्यों लिए ? क्या मोतीगंज में इतना महंगा है न्याय ? सच तो यह है कि ढुलमुल पुलिस प्रशासन और थाने पर जब तक ऐसे निष्क्रिय थानेदार तैनात रहेंगे तब तक सुनील यादव और विनय राय जैसे बेलगाम सिपाही पीड़ितों को लूटते रहेंगे!

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