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बन्दी का अंतिम संस्कार करा जेल अधीक्षक ने सिखाया मानवता का पाठ


बहराइच। बहराइच जिला कारागार में तीन वर्षों से निरुद्ध बंदी की मौत होने के बाद उसके अपनों ने शव लेने से इंकार कर दिया। शव को ठुकराने के बाद जेल अधीक्षक ने उसके शव को लेकर अंतिम संस्कार कराया। पयागपुर थाना क्षेत्र के मातादीन सिंहपुरवा इमलियागंज गांव के रामकरन पासी (45) पुत्र बेचू गैर इरादतन हत्या के मामले में 29 जुलाई 2014 से जेल में निरुद्ध थे। उसकी पत्नी दो साल पहले जेल में उससे मिलने आई थी, लेकिन घर लौटते समय हादसे में उसकी मौत हो गई थी। राम करन के दो बेटे व एक बेटी है। मृतक बंदी पिछले एक साल से शुगर व टीबी रोग से बीमार चल रहा था। जेल अधीक्षक ललित मोहन पांडेय ने बताया कि 28 जुलाई को हालत बिगड़ने पर बंदी को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। छह अगस्त को तबियत में सुधार होने पर वापस जेल लाया गया था। हालत खराब होने पर आठ सितंबर को फिर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां शुक्रवार को उसकी मौत हो गई। इसकी सूचना मृतक के गांव भेजी गई, लेकिन प्रधान रमपता ने लिखित जानकारी दी कि गांव में अब परिवार का कोई नहीं रहता है। इसके बाद मौत की सूचना कैसरगंज में रिश्तेदारों को दी गई, लेकिन उन्होंने शव लेने या अंतिम संस्कार करने से इंकार कर दिया। समझाने के बाद रिश्तेदार सिर्फ पंचनामा में शामिल हुए।

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