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कौशांबी:लागत की आधी भी नहीं मिल रही आलू की कीमत फिर कोल्ड स्टोर में सड़ेगा आलू


सत्येन्द्र खरे
कौशांबी : कोल्ड स्टोर में डंप आलू उठाने को लेकर किसान हिम्मत नहीं जुटा पा रहा। जितनी लागत है। उसका आधा भी मूल्य किसान को मिलता दिख नहीं रहा। इस स्थित को देखकर अंदाजा लगाया जा रहा है कि आलू किसान बर्बादी की कगार में पहुंच गया है। अब किसान सरकार की ओर मदद के लिए निहार रहा है। 
     जब आलू का भाव आता है तो किसानों के साथ ही व्यापारियों को रंक से राजा बना देता है, लेकिन भाव बिगड़ने पर किसान बर्बादी की कगार में पहुंच गया है। इस वर्ष हुई बंपर पैदावार के बाद जिसके कारण जिले के आठ कोल्ड स्टोर आलू से भर गए। सितंबर माह में कोल्ड स्टोर से आलू निकालने के लिए किसानों का मेला सा लगा रहता था, लेकिन इन दिनों किसान कोल्ड स्टोर तक आते ही नहीं जो किसान आलू के निकासी के लिए कोल्ड स्टोर तक आ रहे है वह भी कम मात्रा में आलू की निकासी कर रहे। किसानों के इस रवैया से कोल्ड स्टोर संचालक भी हैरान है। उनको लगने लगा है कि किसानों ने आलू की निकासी नहीं की तो उनके सामने कोल्ड स्टोर के खर्च निकालने का संकट आ जाएगा। 

शुरूआती तेजी ने आलू की ओर मुड़े किसान 
- आलू की कीमत खुदाई के दौरान तेज थी। किसानों लगा की इस बार अच्छी बिक्री होगी। जिससे उसे आलू के अधिक भाव मिल सकते हैं। इसका अंदाजा लगाते हुए किसानों ने भारी मात्र में स्टोर में आलू रख दिया। अब स्थित यह हो गई है कि जिस आलू को व्यापारियों ने रखा है वह एक साथ कोल्ड स्टोर से बाहर आ गया। जिससे आलू के भाव गिर गए। स्थित यह बन गई है कि किसान आलू को स्टोर से उठाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा। 

किसानों की लागत भी नहीं निकली 
अच्छे आलू की कीमत इन दिनों 350-400 रुपये कुंतल है। जबकि थोड़ा सा खराब आलू की कीमत 300-370 रुपये प्रति कुंतल है। किसान को आलू के लिए 220 रुपये कोल्ड स्टोर को भुगतान करना होगा। इसके साथ ही सात रुपये प्रति बोरी की दर से पल्लेदारी देना होता है। किसान को खेत से कोल्ड स्टोर तक आलू लाने में प्रति कुंटल 100 रुपये खर्च करने पड़े। इसके बाद किसान को दोबार आलू को घर ले जाने में 107 रुपये इस प्रकार किसानों की कुल लागत करीब 427 रुपये आती है। इसके साथ ही प्रति बीघा किसान को आलू की पैदावार के लिए 15 से 20 हजार रुपये लगाना पड़ रहा। 
 ऐसे में किसान यदि कोल्ड स्टोर से आलू निकालते है तो उसकी लागत भी नहीं निकल पाएगी। किसान आलू को स्टोर से निकालने में हिचकिचा रहा। 

आम आदमी को नहीं मिल रही राहत 
- आलू किसान कोल्ड स्टोर से निकाल नहीं रहा। कीमत इतनी कम है कि उसकी लागत भी नहीं निकल रही। आलू की इस स्थित के बाद भी आम आदमी को राहत मिलती नहीं दिख रही। मंझनपुर, ओसा व समदा में सप्ताह में दो दिन बाजार लगाती है। यहां मंझनपुर कस्बे के साथ ही आस-पास के गांव के लोग सब्जी खरीदने आते है। आलू की कीमत कम होने के बाद भी यहां स्थानीय व्यापारी आम लोगों को 20 रुपये में तीन किलो से कम दाम पर आलू देने को तैयार नहीं। लोग बिना किसी विवाद के उनसे इस कीमत पर आलू खरीद भी रहे हैं, लेकिन किसान का आलू कोई लेने को तैयार नहीं। जिससे उसके सामने समस्या खड़ी हो गई है।

व्यापारियों ने आलू से पाटा बाजार 
कोल्ड स्टोर में किसानों को ही नहीं व्यापारियों का आलू भी भारी मात्रा में रहता है। आलू की बुआई का समय आ गया है। ऐसे में किसान अपना आलू निकालता। इससे पहले की व्यापारियों ने अपना आलू स्टोर से बाहर निकाल दिया। एक साथ भारी मात्रा में स्टोर से आलू निकाले जाने के कारण बाजार में आलू की भरमार हो गए। जिससे आलू की कीमते थोक भाव में कम हो गई। अब किसान का आलू कोई खरीदने को तैयार नहीं। 

फायदे में रहा व्यापारी 
- आलू पैदावार के बाद किसानों ने अपना आलू स्टोर में डंप कर दिया। वहीं व्यापारी ने आलू को समय-समय पर निकाला और उसे बेचते रहे। जिसके कारण वर्ष के आम दिनों में उनके आलू को अच्छा भाव मिला। अब किसानों का आलू बाहर आता इससे पहले की कीमतें कम हो गई। आलू की ओर कोई देखने का तैयार नहीं। 
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संकोच बनी समस्या 
- कौशांबी में किसान खुद फसल की पैदावार तो कर लेता है, लेकिन वह अपनी फसल को लेकर मंडी में बैठकर बेचने से कतराता है। ऐसे में उसको व्यापारियों का सहारा लेकर फसल को बेचना पड़ता है। किसान की इसी मजबूरी को देखते हुए व्यापारी इसका लाभ उठाता है। पहले तो खेत में तैयार फसल को कम कीमत में खरीदता है। इसके बाद फसल तैयार होने के बाद उनकी कीमतों को भी नियंत्रित कर लेता है। जिससे किसान को हर बार घाटे का सामना करना पड़ता है। 

क्या कहते है किसान 

- कोल्ड स्टोर में इस बार कम मात्रा में आलू रखा है। जिसके कारण केवल खाने के लिए आलू ले जा रहे हैं। यदि अधिक मात्रा में आलू रखते तो इस बार उसको स्टोर से निकालने में घाटे का सामना करना पड़ता। शुरू में ही आलू को व्यापारियों के हाथ बेच दिया। जिससे कुछ राहत है। 
- श्रीनाथ किसान


- सरकार की ओर से किसानों को बैंक ऋण माफ किया जा रहा है। ऐसे में सरकार को चाहिए कि वह किसानों की मदद के लिए उनका कोल्ड स्टोर व्यय से भी छूट दिलाए। जिससे किसानों का नुकासान कुछ काम हो सके। सरकार ने आलू खरीद को लेकर जो नीति बनाई थी। उसमें भी सुधार करने की जरूरत है।
- सुरेंद्र सिंह 


- आलू कोई भी व्यापारी खरीदने को तैयार नहीं है। करीब 44 कुंतल आलू कोल्ड स्टोर में रखा है जो परिवार के लोग खा भी नहीं सकते। ऐसे में वह आलू उठाते भी है तो उसकी लागत भी नहीं निकलेगी। कुछ दिन और इंतजार कर रहे हैं। कोई खरीदार मिला तो ठीक है नहीं आलू छोड़ देना ही बेहतर होगा। 
- अजय सिंह, किसान


- स्टोर में करीब 450 बीघे आलू रखा है। इसमें अधिक मात्रा में बीज के लिए आलू रखा गया है। सही कीमत मिली तो आलू की उठान की जाएगी। खाने के लिए रखे आलू को उठाने की संभावना नहीं है। उसके लिए लागत भी नहीं निकल पा रही। 
- इश्तयाक अहमद, आलू बीज कारोबारी 

2008 वाले होंगे हालात 
- वर्ष 2008 में किसानों ने भारी मात्रा में आलू कोल्ड स्टोर में रखा था। अचानक आलू की कीमतें कम हो गई। जिसके बाद किसान स्टोर से आलू उठाने ही  नहीं आए। जिससे कोल्ड स्टोर को घाटे का सामना करना पड़ा। इस बार भी यही स्थित दिख रही है। किसानों ने स्टोर से आलू नहीं उठाया तो घाटे का सामना करना पड़ेगा। इस बार करीब 20 फीसद आलू खराब होने की संभावना भी है। यह वह आलू है जिसे किसान ने मशीन की मदद से खुदाई कराई थी। 

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