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यहाँ थारू जनजाति के लोग ने जंगलों के बीच बसाया था माँ का ये मंदिर,पढ़ें पूरी खबर !

 राजकुमार शर्मा


बाबागंज(बहराइच)।
बाबागंज ब्लॉक मुख्यालय से तकरीबन एक किलोमीटर की दूरी पर घने जंगल के बीच डेरा डालकर रह रहे नेपाली थारू खाना बदोशों ने कभी देवी माँ को प्रसन्न करने के लिए कन्या की बलि दी थी ।जिसके बाद इसी स्थान पर थारू मिट्टी की देवी प्रतिमा बनाकर उसकी पूजा अर्चना करने लगे। धीरे धीरे आबादी एवं जनसंख्या बढने के साथ साथ जंगल कटते गये और गांव बसने लगे। लेकिन यह स्थान आज भी सिद्थ आस्था का केंद्र के रूप में प्रसिद्ध है। ऐसा माना जाता है कि यहाँ पर सच्चा मन से मांगी गई मुराद अवस्य पूरी होती है।


नवरात्रि में दूर दूर से लोग यहाँ पूजा अर्चना करने यहाँ आते है ।यह तक परोसी देश नेपाल के बर्दिया बाके कर्णाली तक इसकी मंटा फैली हुई है। अब मंदिर परिसर में लक्ष्मी नारायण भगवान का एक भव्य मंदिर बन गया है। जहाँ प्रतिवर्ष नौ दिन की भागवत कथा व भंडारा आयोजित होता है। इसी परिसर में एक शिव मंदिर भी स्थापित है। नवरात्र में यहाँ नौ दिन का भंडारा चलता है । हजारो भक्तगण प्रसाद ग्रहण करते है। बाबागंज कस्बे से मात्र सात किमी की दूरी पर वीरपुर सोरहिया में स्थित चौरी कुटिया का मंदिर सिद्ध आस्था का केंद्र के रूप में स्थित है। इस मंदिर को लेकर कई किवंदतीया प्रचलित है। ऐसा माना जाता है कि पहले यहां कभी जंगल था । नेपाल के खाना बदोश थारू जनजाति के लोग यहाँ पर डेरा डालकर रहते थे। यह लोग देवी माँ के भक्त थे। नवरात्र में चौरा बनाकर देवी माँ की पूजा अर्चना करते थे। नवरात्र में ही देवी माँ को प्रसन्न करने के लिए इन लोगो ने कभी यहाँ एक कन्या की बलि दी थी ।ऐसा माना जाता है कि भगवती ने प्रसन्न होकर इस स्थान को सिद्थ होने का वरदान दिया था । तबसे यह सिद्थ हो गया । यहाँ पर एक नीम का पेड़ लगा था जमीन पर चारो ओर हरी घास जम गई लेकिन जिस स्थान पर चौरा बनाया गया था उस स्थान पर कभी भी घास नही लगी । सन्न 1965 में वीरपुर निवासी काशीराम जैसवाल ने इस स्थान पर एक पक्का चबूतरा बनवाकर पुत्र होने की मन्नत मांगी तो उनकी मनोकामना पूरी हुई ।और उन्हें एक पुत्र प्राप्त हुआ । जिसकी चर्चा क्षेत्र में फैली और दूर दूर से लोग मन्नत मांगने यहाँ पहुचने लगे। इसी प्रकार मुन्ना सोनी ,रामकुमार सोनी लगायत दर्जनो लोगो ने भी अपनी मुराद मांगी जो माता जी की कृपा से पूरी हो गई। जिसपर लोगो ने खुस हो कर अनेक प्रकार से मंदिर में अपना अपना योगदान दिया। यही कुछ कारण है कि मंदिर का निरंतर विकास होता रहा। महानंदपुरवा निवासी पुजारी ने बताया कि इस स्थान पर पूजा अर्चना करते थे। कालांतर में चौरा के रूप में था अब भब्यता लेता जा रहा है। क्षेत्र के मुन्ना लाल सोनी यहाँ लक्ष्मी नारायण भगवान का भब्य मंदिर बनवाया है। जहाँ प्रतिवर्ष श्रीमद्भागवत कथा व भण्डारा का आयोजन किया जाता है। इसी के बगल में शिव भगवान का मंदिर है। नवरात्र में मंदिर परिसर में नौ दिन का मेला चलता है इसके अतिरिक्त प्रत्येक सोमवार व बृहस्पतिवार को बड़ी संख्या में श्रद्धयालु दर्शन के लिए आते है। क्षेत्रीय पूर्व विधायक शब्बीर अहमद बाल्मीकि ने अपने कार्यकाल में हैंडपम्प लगवाया था ।इतना ही नही यहाँ पहुचने के लिए सडक़ का निर्माण भी हो चुका है। इसी प्रकार लोगो की मुराद पूरी होती गयी और मंदिर आस्था का स्थान निरंतर आगे विकास करता गया। लोगो की मन्नते पूरी हुई तो उन्होंने मंदिर में कुछ न कुछ योगदान अपना जरूर किया। पर सूत्रों की माने तो जो लोगो ने मन्नते पूरी होने पर अपना कुछ भी योगदान नही किया तो उनका भारी नुकसान भी हुआ यही कारण है कि इस आस्था की मंदिर का प्रचार होता गया।

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