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नवरात्रि का तीसरा दिन आज माँ चंद्रघण्टा कि होती है उपासना





बहराइच। शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन देवी मंदिरों में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। भोर होते ही श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिरों में उमड़ने लगी। नगर के अधिकांश क्षेत्रों में माँ की अद्भुत प्रतिमाओं को रख कर पूजा-अर्चना का कार्य किया जा रहा है,इसी क्रम में शहर के नारायण नगर लोहिया चौराहे पर स्थित माँ दुर्गा की प्रतिमा लोगो के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुकी है। पूजा कार्यक्रम के आयोजक बृजेश गुप्ता द्वारा हर वर्ष पूजा कार्यक्रम में देश भक्ति का समागम कराते हुवे अविश्वसनीय कार्यक्रमों प्रदर्शन कराया जाता है। नारायण नगर लोहिया चौराहे पर रखने जाने वाली प्रतिमा जिले में अपने अनोखे प्रोग्रामों के कारण हर वर्ष मशहूर रहती है।
भक्तों ने नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा कर मां दुर्गा के उपासको और भक्तों ने माँ दुर्गा से अनंत कोटि फल प्रदान करने की मनोकामना माँगी। मां ब्रहचारिणी मां दुर्गा की नवशक्ति का दूसरा स्वरूप है। माता ब्रह्मचारिणी का स्वरुप बहुत ही सात्विक और भव्य है। माँ ब्रम्ह का अर्थ तपस्या से है। मां दुर्गा का यह स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनंत फल देने वाला है। इनकी उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है।
आज है नवरात्रि का तीसरा दिन,यह दिन माँ दुर्गा का तृतीय रूप श्री चंद्रघंटा के रूप में जाना जाता है। इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है। नवरात्रि के तृतीय दिन इनका पूजन और अर्चना किया जाता है। इनके पूजन से साधक को मणिपुर चक्र के जाग्रत होने वाली सिद्धियां स्वतः प्राप्त हो जाती हैं तथा सांसारिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। इनकी आराधनासे मनुष्य के हृदय से अहंकार का नाश होता है तथा वह असीम शांति की प्राप्ति कर प्रसन्न होता है। माँ चन्द्रघण्टा मंगलदायनी है तथा भक्तों को निरोग रखकर उन्हें वैभव तथा ऐश्वर्य प्रदान करती है। उनके घंटो मे अपूर्व शीतलता का वास है।


माँ चंद्रघण्टा की पूजा के लाभ


इनकी अराधना से प्राप्त होने वाला सदगुण एक यह भी है कि साधक में वीरता-निर्भरता के साथ ही सौम्यता एवं विनम्रता का विकास होता है। उसके मुख, नेत्र तथा सम्पूर्ण काया में कान्ति-गुण की वृद्धि होती है। स्वर में दिव्य, अलौकिक, माधुर्य का समावेश हो जाता है। माँ चन्द्रघंटा के साधक और उपासक जहाँ भी जाते हैं लोग उन्हें देखकर शान्ति और सुख का अनुभव करते हैं। ऐसे साधक के शरीर से दिव्य प्रकाशयुक्त परमाणुओं का दिव्य अदृश्य विकिरण होता है। यह दिव्य क्रिया साधारण चक्षुओं से दिखलायी नहीं देती, किन्तु साधक और सम्पर्क में आने वाले लोग इस बात का अनुभव भलीभांति कर लेते हैं साधक को चाहिए कि अपने मन, वचन, कर्म एवं काया को विहित विधि-विधान के अनुसार पूर्णत: परिशुद्ध एवं पवित्र करके उनकी उपासना-अराधना में तत्पर रहे। उनकी उपासना से हम समस्त सांसारिक कष्टों से विमुक्त होकर सहज ही परमपद के अधिकारी बन सकते हैं। हमें निरन्तर उनके पवित्र विग्रह को ध्यान में रखते हुए साधना की ओर अग्रसर होने का प्रयत्न करना चाहिए। उनका ध्यान हमारे इहलोक और परलोक दोनों के लिए परम कल्याणकारी और सदगति देने वाला है। माँ चंद्रघंटा की कृपा से साधक की समस्त बाधायें हट जाती हैं। भगवती चन्द्रघन्टा का ध्यान, स्तोत्र और कवच का पाठ करने से मणिपुर चक्र जाग्रत हो जाता है और सांसारिक परेशानियों से मुक्ति मिल जाती है।



बॉक्स में:-
माँ चन्द्रघंटा को प्रसन्न करने हेतु मंत्र :


या देवी सर्वभू‍तेषु माँ चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।


पिण्डज प्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते महयं चन्द्रघण्टेति विश्रुता।।

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