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बस्ती:काव्य संग्रह श्रद्धासुमन का हुवा लोकार्पण


कठिन समय में आश्वस्त करती हैं रामचन्द्र ‘राजा’ की रचनायें-रघुवंशमणि
राकेश गिरी 
बस्ती। ऐसे समय में जबकि धर्म के नाम पर पाखण्ड करने वालों का सच समाज के सामने आ रहा है रामचन्द्र ‘राजा’ कृत ‘श्रद्धा सुमन’ आश्वस्त करती है कि सब कुछ कभी समाप्त नहीं होता । सुदीर्घ गुरू परम्परा और मानवीय संवेदनाओं की      धारा अभी समाप्त नहीं हुई है। यह विचार प्रवक्ता रघुवंशमणि ने व्यक्त किया। वे रविवार को प्रेस क्लब में काव्य संग्रह श्रद्धा सुमन के लोकार्पण अवसर आयोजित कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के रूप में सम्बोधित कर रहे थे। 
कहा कि श्रद्धा सुमन की रचनाओं मंे भक्तिकालीन परम्पराओं का पालन हुआ है।  रचनाकार कबीर से प्रभावित हैं और इसकी झलक रचनाओं में दिखाई पड़ती है। ‘उड़त परवेरू गगन में, ज्यों-ज्यों ऊपर जाय, ऐसेहि ज्ञान के कुंड में, ‘राजा रहयो समाय’।  ईश्वर में अडिग विश्वास रखते हुये रामचन्द्र राजा की रचनायें आध्यात्म के विविध विन्दुओं पर विस्तार से प्रकाश डालते हुये आस्था को समृद्ध करती हैं।
विशिष्ट अतिथि प्रेस क्लब संरक्षक प्रकाश चन्द्र गुप्ता ने कहा कि आज समाज को ऐसे ही रचनाओं की आवश्यकता है। पितृ पक्ष में श्रद्धासुमन का लोकार्पण कर राम चन्द्र राजा ने पूर्वजों के प्रति भी श्रद्धा व्यक्त किया है।
अध्यक्षता करते हुये साहित्यकार सत्येन्द्रनाथ ‘मतवाला’ ने कहा कि श्रद्धा सुमन में रचनाकर ने जो विषय उठायें हैं उनका सम्बन्ध आध्यात्मक की गहराईयों से है। आज समाज को ऐसे ही प्रेरणाप्रद साहित्य की आवश्यकता है। 
कार्यक्रम का संचालन करते हुये प्रेस क्लब अध्यक्ष विनोद कुमार उपाध्याय ने पुस्तक से जुड़े अनेक प्रसंगों को विस्तार से रखा। 
दूसरे चरण में श्रद्धा सुमन के लोकार्पण अवसर पर कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें हरीश दरवेश, कलीम वस्तवी, सागर गोरखपुरी, आतिश सुल्तानपुरी, ताजीर वस्तवी, शाहिद बस्तवी, रहमान अली रहमान आदि ने काव्य पाठ के माध्यम से वर्तमान विसंगतियों को स्वर दिया। कार्यक्रम में अनेक कवि, साहित्यकार और समाजसेवी उपस्थित रहे।

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