बहराइच । इसे संयोग नही तो और क्या कहा जा सकता है कि विधानसभा चुनाव के दौरान सत्तारुढ़ दल भाजपा ने अपने चुनावी संकल्प पत्र में कानून व्यवस्था को मुख्य चुनावी हथियार बनाया था बनाया ही नही हर सभाओं में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर कानून व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगा ध्वनि विस्तारक यंत्र से जोर जोर आवाज में इसका प्रचार प्रसार करते हुए उनके कार्यकाल में हुए तमाम घटनाओं को जनता के सामने रख भाजपा के सत्ता में आने पर अविलम्ब इसे दुरुस्त करने का वादा भी किया था । चुनाव सम्पन्न हुआ भाजपा अपनी उम्मीद से ज्यादा सीट पाकर सत्ता पर काबिज हुई ।
योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने और इस पर कार्य शुरू हुआ । 17 वीं विधानसभा गठन और सरकार बने लगभग सात माह का वर्ष बीत चुका है । लगभग आधा दर्जन पुलिस अधीक्षकों के तबादले के बाद जिले को एक तेज तर्रार एस पी जुगुल किशोर के रूप में मिला । एस पी ने जिले के कानून व्यवस्था की बागडोर अपने हाथ में लेते ही सभी सम्बंधित अधिकारियों व ढीले पड़े थानेदारों के पेंच कसने शुरू किये । जैसे ही पुलिस ने अपराधियों दो पहिया वाहनों पर तीन व चार सवारियों और हेलमेट न लगाकर चलने वालों के विरुद्ध अभियान छेड़ा वैसे ही जिले भर के टुटपूंजियां नेताओं पर मानो पहाड़ टूट पड़ा ।
वो नेता जो पार्टी के कर्यक्रमों में दूर दूर तक कहीं नजर नही आते थे आज वे निकाय चुनाव का हवाला देकर इसे बन्द करने की मांग कर रहे हैं । इतना ही नही ऐसे टुटपुंजिया नेता आज एक ईमानदार कर्तव्यनिष्ट थानेदार के खिलाफ लामबंद होकर बदनाम करने का कुचक्र रच रहे हैं ।
सरकार मे वर्क की चमचमाहट से चकाचौंध हुए भाजपाई भाजपा और अपने नेतृत्व का मूल मन्त्र ही भूल बैठे। फलस्वरूप कार्य करने वाले सरकारी कर्मचारी अपने कार्यों में हस्तक्षेप के चलते बेबस नजर आ रहे हैं । इस मुद्दे पर जब हम बात करने सम्बन्धित अधिकारी के पास गए तो मामला सत्तापक्ष से जुड़ा होने के चलते किसी ने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया किन्तु मुख्य द्वार पर खड़े एक विभागीय कर्मचारी इस पीड़ा पर खुद को न रोक सका । नाम न छापने की शर्त पर उसने बताया कि चक्रमण कर रही पुलिस को चक्रव्यूह की तरह परेशान किया यदि इसी तरह किया जाता रहा तो वो दिन दूर नही होगा जब नेता जी को जनता सरे राह कथनी और करनी पर घेरकर पूछैगी कि यही है तुम्हारा रामराज्य।



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