सत्येन्द्र खरे
कौशांबी : त्वरित न्यायालय प्रथम के न्यायाधीश दिनेश पाल यादव ने तीन वर्ष पूर्व दहेज हत्या मामले की सुनवाई की। आरोप सिद्ध पाते हुए उन्होंने पति को दस वर्ष की कैद व 25 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
पिपरी थाना क्षेत्र के पेरई गांव निवासी अमृतलाल पुत्र शीतला प्रसाद ने 18 जुलाई 2014 को पुलिस को तहरीर देकर बताया था कि उसने अपनी बेटी सुमित्रा की शादी एक वर्ष पूर्व जयकरन पुत्र घसीटेलाल निवासी टडहर थाना कोखराज के साथ किया था। शादी के कुछ दिनों बाद से ही सुमित्रा के पति व सास-ससुर 50 हजार नगद व एक बाइक के लिए प्रताड़ित करते थे। बाद में उसकी हत्या कर दिए। पिता के अनुसार 16 जुलाई को सुमित्रा की हत्या के बाद मायके पक्ष के लोग शव को गांव के बाहर फेंककर फरार हो गए। घटना के दूसरे दिन कुछ लोगों ने इसकी जानकारी सुमित्रा के मायके पक्ष के लोगों को दी। मौके पर पहुंचे मृतका के पिता अमृतलाल ने बताया कि बेटी गर्भवती थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी इसकी पुष्टि हुई। पुलिस ने अमृतलाल की तहरीर पर पति व सास-ससुर के खिलाफ दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया। जांच के बाद आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया। मामले का विचारण त्वरित न्यायालय प्रथम की अदालत में चला। अभियोजन की ओर से शासकीय अधिवक्ता तीरथ सिंह यादव ने कुल पांच गवाहों को पेश किया। मामले की सुनवाई बुधवार को हुई। दोनों पक्षों को सुनने व पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों के अवलोकन के बाद न्यायालय ने आरोपी पति को जयकरन पटेल को दहेज हत्या का दोषी पाया और उसे दस वर्ष के कैद की सजा सुना दी।


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