ग्रामीण क्षेत्र के काम करने के स्थान पर चुना शहरी जीवन
सत्येन्द्र खरे
कौशांबी : जिले के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिले। इसके लिए ग्रामीण व शहरी क्षेत्र में चिकित्सालय बनाने के साथ ही उनके डाक्टरों की तैनाती की गई है।जिले के पांच स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात चिकित्सकों ने बगावती तेवर अपनाते हुए अस्पताल आना बंद कर दिया है। इन डाक्टरों के खिलाफ सीएमओ कार्यालय की ओर से नोटिस भेजकर जवाब मांगा गया है। समय से जवाब न देने पर डाक्टरों के खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई होगी।
डाक्टरों को धरती का भगवान कहा जाता है, लेकिन इन भगवानों को ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात रहते हुए गरीबों की सेवा करना रास नहीं आया। वह शहर में सुख सुविधा के साथ निजी प्राक्टिस कर रहे हैं। ऐसे में जिले के पांच चिकित्सकों ने चिकित्सालय आना बंद कर दिया है। सीएओ डा. दीपेंद्र मालवीय ने बताया कि जिले के तीनों तहसील में तैनात रहे पांच चिकित्सक अस्पताल नहीं आ रहे। एक डाक्टर तो करीब तीन साल से अस्पताल नहीं आए। ऐसे में पहले इन चिकित्सकों से व्यक्तिगत संपर्क किया गया था। इसके बाद भी वह अस्पताल नहीं आ रहे। सभी के खिलाफ नोटिस जारी की गई है। इन लोगों ने नोटिस का जवाब नहीं दिया तो इनके बर्खास्तगी की कार्रवाई की जाएगी।
कौन-कौन चिकित्सक नहीं आते अस्पताल
चिकित्सक तैनाती स्थल अस्पताल न आने का समय
डा. बली उल्ला सिद्दीकी: कनैली पीएचसी मार्च 2014
डा. गोविंद प्रसाद : मूरतगंज पीएचसी फरवरी 2015
डा. प्रतिमा : सरसवां पीएचसी अप्रैल 2017
डा. संदीप सिंह :सरसवां पीएचसी अप्रैल 2017
डा. कुसुमावर सिंह : सीएओ कार्यालय फरवरी 2017


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