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गोण्डा:28 वर्ष से एक ही स्थान पर तैनात रेल कार्य निरीक्षक का कारनामा


विद्यालय के नन्हें बच्चों से दिखा खतरा
गोण्डा। पूर्वोत्तर रेलवे के गोण्डा जिले में कई ऐसे अधिकारी तैनात है जो अंगद की तरह पांव जमा कर पिछले दो दशक से अधिक तैनात रह कर रेलवे को करोड़ो का चूना लगा चुके है। ऐसे अधिकारी को विद्यालय के छोटे-छोटे बच्चों को काफी खतरा दिखा और रास्ते को बन्द करा दिया।
जबकि विद्यालय के आस पास रहने वाले रेलवे कालोनी के किसी कर्मचारी को न तो आपत्ति रही और न ही कोई शिकायत किया गया। विद्यालय के सामने का रास्ता उच्चाधिकारी का आदेश बता कर बन्द करा दिया गया। जबकि रेल परिक्षेत्र की 75 प्रतिशत रेलवे चाहरदीवाली टूटी है। अधिकारी को अन्य टूटी दीवालों से खतरा नही दिखा।
बताते चले कि रेल विभाग के रेलवे कालोनियों के चारों तरफ रेलवे ने आवास में रहने वाले कर्मचारियों के सुरक्षा के लिए चाहरदीवाली करा रखी है। इन चाहर दीवारियों में 75 प्रतिशत चाहरदीवाली टूटी है। उनके ईंट तक करीब दो दशक से तैनात विभिन्न पदों पर आईओडब्ल्यू सुरक्षा नही कर पाये। करोड़ों रुपये की रेल लाइन, गिरिजाघर मैदान के एक तरफ लगे लोहे के टीन, लाइन को कबाड़ी के हाथ बेच डाला गया जिसका कोई लेखा जोखा तक नही है। अभी एक वर्ष पूर्व रेलवे द्वारा कुछ स्थानों के क्षतिग्रस्त चाहरदीवाली का निर्माण व मरम्मत कराया गया, लेकिन अधिकांश स्थानों पर जैसे बलवन्त पुरवा व खैराबाग, बड़गांव सीमा को अलग करने वाली चाहरदीवाली में ठेकेदार से मिल कर दीवाल निर्माण न कराके बजट का बन्दर बांट कर ही नही लिया गया बल्कि एक काम्पलेक्स में शराब की दुकान व अन्य दुकानों के रास्ते के लिए लाखों रुपये की सौदेबाजी कर दीवाल नही खिंचायी गयी। उक्त अधिकारी को इस सीमा से खतरा नही दिखा। यदि उसे खतरा दिखा तो खैरा मन्दिर के पास एक प्राथमिक स्तर तक मान्यता प्राप्त विद्यालय से खतरा दिखा जिसके रास्ते को रेल लाइन व कटीले तार लगा कर बन्द कर दिया गया। जबकि इसी रास्ते से नयी बस्ती में रहने वाले सैकड़ों रेल कर्मियों व कालोनी के लोगों को खैरा मन्दिर व अन्य स्थानों पर आना जाना होता था। अब लोगों को घूम कर आना जाना पड़ता है। यह बात नही है कि विद्यालय के पास रास्ता नही है। रास्ता है लेकिन यह भी एक रेलकर्मियों के बच्चों को विद्यालय आने जाने का रास्ता था। अब घूम कर आते जाते है। 
सार्वजनिक स्थलों विद्यालयों के होने पर बन्द नही कर सकते रास्ता
रेल के विभागीय सूत्रों के अनुसार रेल में एक शासन देश है कि यदि रेल परिसर से होकर कोई रास्ता मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च, विद्यालय को जाता है तो उसे पूर्ण रूप से नही बन्द किया जा सकता। यदि बन्द करना आवश्यक है तो पैदल आने जाने के लिए रास्ता छोड़ कर बन्द किया जाये। लेकिन इस नियम को ताक पर रखकर आईओडब्ल्यू ने रास्ता बन्द करा दिया है। 
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