सुनील गिरी
उत्तर प्रदेश के हापुड में एक किसान ने कर्ज से परेशान होकर अपने ही खेत में शीशम के पेड पर लटककर जान दे दी। सरकारें अन्नदाता के लिए कई योजनाएं लेकर आई हैं लेकिन कुछ सरकारी अधिकारियों की लापरवाही इन पर भारी पड़ रही है । सरकारी सिस्टम से हार चुके किसान ने वर्षो से अन्न दे रहे अपने खेत में ही अपनी जीवन लीला समापत कर ली। हापुड़ जनपद के बहादुरगढ़ थाना क्षेत्र के लुहारी गांव में कर्ज से परेशान एक किसान ने अपने ही खेत में जाकर शीशम के पेड़ पर लटक कर आत्महत्या कर ली । बताया जा रहा है कि 35 वर्षीय किसान योगेश काफी दिन से परेशान चल रहा था । बेटी की शादी करने के बाद से ही मृतक योगेश पर 5 लाख रुपए का कर्ज था जिसके चलते योगेश काफी दिन से परेशान था। हर समय कर्जे की बात को लेकर तनाव में रहता था। आज सुबह भी घर से परेशान होकर निकला था और अपने ही गन्ने के खेत में जाकर उसने फांसी लगा ली। बैंकों का ही किसान पर करीब 2 लाख रूपये का कर्जा था जिसके बाद भी प्रदेश सरकार की ऋण माफी योजना में योगेश का कोई नाम नहीं था । योगी सरकार की ऋण माफी योजना भी किसान को कोई लाभ नही पहुंचा सकी और सिस्टम से हार चुके किसान ने मौत को गले लगा लिया। कर्ज से परेशान किसान के आत्महत्या की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन के अधिकारियों में हड़कंप मच गया। गढ़मुक्तेश्वर तहसील प्रशासन किसान की मौत के बाद अपने दस्तावेजों की खोजबीन में जुट गया कि किसान पर कर्ज होने के बाद भी ऋण माफी योजना के तहत उसका कर्ज क्यों माफ नहीं किया गया । गढ SDM ने किसान की मौत की जांच के आदेश दे दिए हैं।


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