सत्येन्द्र खरे
ये हद है बेरहमी व जुल्म की। पिता ने ही अपनी बेटी को घर में कैद कर रखा है। दुकान में वह बेटी को जंजीरों से जकड़कर बैठाता है। पिता को खतरा है कि उसकी बर्बरता की दास्तां दुकान से भागकर बेटी कहीं समाज के सामने बयां न कर दें। कौशाम्बी थाना क्षेत्र के रजऊ का पूरा में स्थित एक दुकान के भीतर किशोरी को बंधक बने कभी भी देखा जा सकता है। किशोरी की इस घुटन भरी जिंदगी पर किसी को भी नहीं तरस आता है | नतीजा यह है कि बेटी आज भी बेरहम बाप के चंगुल में जिंदगी जीने को मजबूर है |
वीडियो बंधक मासूम
कौशाम्बी के गोहरा मारुफपुर ग्राम सभा में बसे एक छोटी सी बस्ती रजऊ का पूरा के एक किराना कारोबारी सोहराब ने तीन शादियां की हैं। पहली व दूसरी बीबी अब उसके साथ नहीं रहती हैं। छह माह पहले सोहराब ने तीसरी शादी की थी। सोहराब की पहली बीबी की बेटी रुकसाना 14 वर्ष की है। उससे एक छोटी बेटी है शबाना। बेटे की आठ साल पहले कुपोषण बीमारी से मौत हो चुकी है। सोहराब अपनी बेटी रुकसाना को घर में प्रताड़ित करता है। वह उसे घर में ही कैद रखता है। रात भर कैद में रखने के बाद सुबह उसको वह बेड़ियों में जकड़कर अपनी किराना की दुकान में बैठा देता है। उसके पैर में जंजीर बांधकर ताला लगा दिया जाता है। सोमवार को मीडिया टीम रजऊ का पूरा गांव पहुंची तो पूछताछ करने पर उसका पिता भाग निकला। इसके बाद रुकसाना से बातचीत की गई। तो वह ख़ामोशी से सब की तरफ देखती रही | रुकसाना की दादी ने बताया की वह घर से भाग जाती है इसलिए उसे जंजीरों में जल्द कर रखा जाता है | जब बूढ़ी महिला सबीना को रुखसाना की हालत की बात बताई गई तो वह दोबारा ऐसा न करने की बात कहती नज़र आई |
वीडियो :क्या कहती है सबीना, रुखसाना की दादी माँ
स्थानीय लोगो ने जब हमने बाय की तो उन्होंने कैमरे में सामने तो कुछ नहीं कहा पर सभी से एक ही बात बताई रुखसाना का पिता मामूली गलती करने पर बेरहमी से उसकी पिटाई करता है। दुकान में जंजीर बांधकर बैठा दिया जाता है। भूख और प्यास लगने पर उसे दूसरों की मदद लेनी पड़ती है। पूछने पर बताया कि ऐसा क्यों किया जाता है कभी आप लोगों ने शिकायत नहीं की तो सभी से बताया कि गाव में दुश्मनी लेने से क्या फायदा।
वीडियो :आंसुओं में डूबी रुकसाना की जिदंगी
पिता के कहर का शिकार रुकसाना की जिदंगी नरक हो चुकी है। घुटन भरी जिदंगी जीने को मजबूर रुकसाना रात-दिन आंसू बहाती हैं, लेकिन इन आंसुओं को पोछने वाला कोई नहीं है। उसकी अश्कबार आंखें उसका दर्द चीख-चीख कर बयां कर रहे हैं, लेकिन न तो पिता को सुनाई दे रहा है, न ही रजऊ का पुरवा गांव के लोगों को। रुकसाना को भी नहीं पता है कि आखिर उसे किस गुनाह की यह सजा दी जा रही है। उसकी उम्र की बेटियां गांव में सखी-सहेलियों के साथ दिन भर खेलती-कूदती हैं और वह जिंदा कठपुतली बनी पिता के इशारों पर घर के कोने-कोने नाच रही है।
रुखसाना से जंजीरों में कैद कर रखे जाने की जानकारी लोकल थाने कौशाम्बी को देकर जब हमने उसे इन्साफ दिलाने की कोशिस की तो यहाँ भी यूपी पुलिस का केवल ढुलमुल रवैया ही सामने आया | सूचना पाकर कौशाम्बी थाने के दो पुलिस वाले मौके पर पहुचे , लेकिन वह भी केवल पूंछ-तांछ और कागजी कार्यवाही तक ही सीमित हो कर रह गए | रुखसाना को उसके बेरहम पिता की कैद से आजाद करने की जगह पुलिस वाले कागज़ी कार्यवाही करे मौके से चलते बने |
वीडियो क्या कहते है एसपी कौशाम्बी
जानवरों से भी बदत्तर जिंदगी जीने को मजबूर कौशाम्बी की बेटी के मामले पर जब हमने कौशाम्बी के एसपी से सवाल किया तो उन्होंने तस्वीरे देखने के बाद जाँच की बात कह रहे है l


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