सुनील उपाध्याय...
बस्ती,/बनकटी
शादी करने का झाँसा देकर आबरू लूटने और पैंतीस हजार रूपये हडपने के अलावा अपने परिजनों के साथ अबिबाहिता के घर में घुसकर मारने पीटने व जानमाल की धमकी देने जैसे गम्भीर धाराओं में मुकदमा दर्ज होने के तीन माह बीत जाने के बाद भी सभी मामले के नामजद गुनहगार पुलिस की पकड से बाहर व्यवस्था का उपहास उडा रहे हैं। जो पुलिस की संदिग्ध कार्यप्रणालियों की पोल खोल रहा है। मामला लाल गंज थाने का है।
.थाना क्षेत्र की एक अविवाहिता ने तीन माह पूर्व 22 सितम्बर को थाने में तहरीर देकर मु.अ.सं. 924/2017 धारा 376, 352, 452, 323, 504, 506, 406, आई.पी.सी.में सात लोगों को नाम जद कराया है। हलाँकि मुकदमा दर्ज होने के पहले पुलिस ने थाने में अविवाहिता और आरोपी को शादी करने के लिये सुलह समझौता कराया था। जो कामयाब नहीं हुआ।और अब तक सभी नामजद मुल्जिमान पुलिस की पकड से बाहर निर्भय होकर घूम रहे हैं।
पीडिता ने बताया कि मुकदमा दर्ज होते ही पुलिस ने मामले के प्रमुख गुनहगार को तत्काल गिरफ्तार तो कर लिया था लेकिन पता नहीं किस कारण से कुछ ही देर बाद उसे छोड भी दिया। जो पुलिस की साफ नीयत पर सवाल खडा करता है।
अब सवाल उठता है कि थाने में गम्भीर दुराचार जैसे धाराओं में दर्ज मुकदमें के मुल्जिमान तीन माह बाद पुलिस की पकड से दूर क्यों ? बताया जाता है कि दर्ज मुकदमें की विवेचना करने की समय सीमा अथिकतम जब तीन माह ही है।तो उक्त मामले की विवेचना में इतना बिलम्ब क्यों ? लालगंज थाने पर क्या पुलिस विभाग के हुक्मरानों का नियन्त्रण नहीं है ? क्या लालगंज पुलिस की लचर व संदिग्ध कार्य प्रणाली से अपराधियों का मनोबल बढने से रोका जा सकता है ?
इस मामले के विवेचक चौकी इन्चार्ज कुदरहा अशोक कुमार वर्मा ने कहा कि मामले का प्रमुख गुनहगार अहमद आज तक फरार चल रहा है।फिर भी लगातार दविश दी जा रही है।उसका बयान लिये बगैर विवेचना कार्य पूर्ण हो पाना सम्भव नहीं है।जबकि अहमद के अलावा शेष छह मुल्जिमानों ने न्यायालय से एरेस्ट स्टे ले लिया है। थानाध्यक्ष विक्रम सिंह ने बताया कि विवेचना होने तक एरेस्ट स्टे प्रभावी रहेगा।


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