विभाग को लाखों की खनन राजस्व की लग रही चपत, प्रशासन मौन
इलाकाई पुलिस की मिली भगत से हो रहा फल-फूल रहा धंधा
सत्येन्द्र खरे
कौशाम्बी : यमुना का सीना चीरकर काली कमाई करने वाले माफिया खनन बंद होने के बाद भी मोटी कमाई करने में जुटे हैं। उन्होंने घाट बंद होने से पहले ही बगैर परमीशन के लाखों रुपए की बालू डंप कर लिया है। चर्चा है कि इलाकाई पुलिस भी माफियाओं को संरक्षण दे रही है। प्रशासन की अनदेखी के चलते खनन विभाग को लाखों रुपए की चपत लग रही है।
दोआबा में तीन महीने तक यमुना घाटों से अरबों रुपए की बालू माफियाओं ने बेची। हालांकि आठ दिसम्बर से टेंडर खत्म हो गया। ऐसे में माफियाओं ने मोटी कमाई करने का नया तरीका इजाद कर लिया। उन्होंने खुद तो घाटों के इधर-उधर अवैध तरीके से बालू डम्प कर लिया। वहीं छोटे माफिया भी कमाई करने के लिए बालू को बगैर परमीशन के ही डंप कर लिया। वह जरूरतमंदों से मोटी रकम लेकर बालू की बिक्री कर रहे हैं। मजबूरी में लोगों को अपनी जेबे ढीली कर बालू खरीदना पड़ रहा है। अवैध बालू की बिक्री के गोरख धंधे पर प्रशासन की नजर नहीं पहुंच रही है। इससे खनन विभाग को राजस्व की चपत लग रही है। सूत्रों की मानें तो बालू के इस खेल में इलाकाई पुलिस की बड़ी भूमिका है। पुलिस की संरक्षण में इन दिनों बालू का कारोबार फलफूल रहा है।
कोखराज के दर्जनों स्थान पर डंप है बालू
यूं तो पूरे जिले में माफियाओं ने मोटी कमाई करने के लिए बालू डंप कर रखा है। पर, सबसे ज्यादा बालू की अवैध डंपिंग कोखराज इलाके में है। वजह यह है कि रोही गांव के समीप ओवर ब्रिज होने के चलते खरीदारों को फाटक का झाम न हो। वह आसानी से बालू को कहीं भी ले जा सकते हैं। इसके अलावा रात्रि को भी आसानी से माफिया बिक्री के लिए और अधिक बालू डंप कर सकते हैं। फोरलेने के आसपास सुबह से लेकर आधी रात्रि तक अवैध तरीके से बालू की बिक्री होती है।
बोले अफसर
जिले में घाट बंद होने के बाद अवैध तरीके से बालू डंप करने की जानकारी नहीं है। कौन-कौन से थाना क्षेत्रों में बालू अवैध तरीके से डंप है। इसकी जांच कराई जाएगी। अवैध बालू तो सीज होंगे ही। इसके अलावा संबंधित थाने की पुलिस पर भी कार्रवाई होगी।
मनीष कुमार वर्मा, डीएम


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