मिथलेश शुक्ला (नीतू)
गोंडा / बभनान:राष्ट्र हमसे बना है और हम राष्ट्र से बने है। सेवा भाव से अहंकार का पतन संभव है। राष्ट्रीय सेवा योजना शिविरार्थीयो के अंदर सेवा, सर्मपण, व प्रेम भाव को जगाने मे सहायक सिद्ध होती है।
उक्त बातें आचार्य नरेंद्र देव किसान स्नातकोत्तर महाविद्यालय बभनान के प्राचार्य डॉ प्रभाकर मिश्र ने जे देवी महिला महाविद्यालय बभनान में एनएसएस शिविरार्थी को संबोधित करते हुए शिविर के समापन पर कहीं।
विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर शिविरार्थीयों को हिंदी भाषा पर कहा कि भाषा भावों और विचारों की वाहक होती है जिसके माध्यम से मनुष्य परस्पर व्यवहार करने में सक्षम होते हैं। मानव द्वारा संचालित सृष्टि के सभी कार्यों में भाषा की भूमिका सर्वोत्तम मानी गई है और यह एक आधारभूत सच्चाई है कि जिस भी भाषा को मनुष्य अपने परिवेश से सहज रूप में अपना लेता है वह कोई जन्मजात प्रवृति नहीं होती और न ही उसके या उसके तत्कालीन जनसमुदाय द्वारा रची गई भाषा होती है, वह भाषा तो युग-युगान्तरों से जन समूहों के सांस्कृतिक व सभ्याचारिक सन्दर्भों से निर्मित होती है और उस समाज के विकास के साथ-साथ ही विकसित होती जाती है। यही कारण है कि जो समाज जितना अधिक विकसित होता है उस समाज की भाषा उतनी ही उन्नत होती है अथवा यह भी कहा जा सकता है कि किसी समाज के विकास की पहचान उसकी भाषा से की जा सकती है।
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| मौजूद शिविरार्थी |
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| दीप प्रज्ज्वलन |
इसके पहले शिविरार्थी छात्रा दीपा द्वारा सरस्वती वंदना साज विणा मेनजर आए मॉ शारदे....... की प्रस्तुति की गयी। शिलम, दीपा स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रमाधिकारी डॉ संतोष व डॉ राजेश द्वारा मुख्य अतिथी व आए हुए गणमान्यो के प्रति आभार व्यक्त किया गया। इस अवसर पर डॉ भूपेश, स्नेहा जायसवाल, डॉ किरन त्रिपाठी, बृज भूषण लाल श्रीवास्तव, विक्रम पांडे, स्कंद शुक्ल, संतोष पाठक, हरजीत कौर, सीमा वर्मा, सहित तमाम शिविरार्थी छात्राएं वह गणमान्य लोग मौजूद रहे।




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