सुनील उपाध्याय
बस्ती । स्वामी विवेकानन्द जयन्ती की पूर्व संध्या पर गुरूवार को कलेक्टेªट परिसर में कबीर साहित्य सेवा संस्थान द्वारा एक संगोष्ठी का आयोजन साहित्यकार सत्येन्द्रनाथ मतवाला की अध्यक्षता में किया गया।
स्वामी विवेकानन्द के जीवन वृत्त पर प्रकाश डालते हुये मुख्य अतिथि के रूप में डा. वी.के. वर्मा ने कहा कि हमारे देश में कई ऐसे महापुरुष हुए हैं, जिनके मुंह से निकले शब्द जीवन में सफलता के मंत्र बन जाते हैं। इसके अलावा ये शब्द कई बार एक निराश व्यक्ति के अंदर भी एक नई ऊर्जा फूंक देते हैं। 12 जनवरी को जन्में स्वामी विवेकानंद भी ऐसी ही महापुरुष थे जिनके वचन युवाओं में एक नई जान फूंक सकते हैं। आवाहन किया कि नई पीढी स्वामी विवेकानन्द के संदेशों को आत्मसात करें।
गोष्ठी को ओम प्रकाश धर द्विवेदी, डा. रामकृष्ण लाल ‘जगमग’ मोहम्मद वसीम अंसारी, डा. सत्यदेव त्रिपाठी, आतिश सुल्तानपुरी, सागर गोरखपुरी, लालमणि प्रसाद, रामचन्द्र राजा, हरीश दरवेश, सुमेश्वर प्रसाद यादव, पेशकार मिश्र आदि ने सम्बोधित करते हुये कहा कि स्वामी विवेकानन्द का जीवन संघर्ष प्राणि मात्र के उत्थान को समर्पित है। वे आधुनिक संयासी थे जिन्होने धर्म को जीवन की आवश्यकताओं से जोड़ा। ‘उठो और जागो और तब तक रुको नहीं जब तक कि तुम अपना लक्ष्य प्राप्त नहीं कर लेते’‘ जब तक जीना, तब तक सीखना, अनुभव ही जगत में सर्वश्रेष्ठ शिक्षक है’ ‘ हम वो हैं जो हमें हमारी सोच ने बनाया है, इसलिए इस बात का ध्यान रखिए कि आप क्या सोचते हैं। शब्द गौण हैं। विचार रहते हैं। वे दूर तक यात्रा करते हैं।’’ जैसे उनके संदेश युगो तक सार्थक रहेंगे।
कार्यक्रम में डा. वी.के. वर्मा को ‘कबीर गौरव’ सम्मान से अंग वस्त्र भेंटकर सम्मानित किया गया। संस्थान अध्यक्ष मो. सामईन फारूकी ने आभार व्यक्त किया। जय प्रकाश गोस्वामी, पेशकार मिश्र, दीपक प्रसाद, जगदीश प्रसाद, दीनानाथ यादव के साथ ही अनेक साहित्यकार, कवि उपस्थित रहे।


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