सुनील उपाध्याय
बस्ती। पिछले 9 दिनों से घाघरा में डूबे 4 लापता लोगों की तलाश के दौरान ग्रामीणों ने अपनी कोशिश से घाघरा में लापता बारा लखन्दर पुत्र चिरकुट की लाश को नदी से खोज निकाला। पीड़ित परिवारों को उनका हक दिलाने के लिये क्रमिक अनशन पर बैठे उ.प्र. आवास विकास परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष सपा नेता सिद्धार्थ सिंह ने बताया कि प्रशासन ने जिन लोगों को खोज में लगाया था वे यह कहकर लौट गये कि अब लाश मिलने की कोई उम्मीद नहीं है किन्तु बारा लखन्दर की लाश मिलने के बाद उम्मीद बढ गई है कि शायद घाघरा में लापता तीन और लोगों का शव ग्रामीण ढूढ निकालें।
दुबौलिया विकास खण्ड के घाघरा घटना स्थल के नजदीक उ.प्र. आवास विकास परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष सिद्धार्थ सिंह के नेतृत्व में परिजनों और क्षेत्रीय नागरिकांे द्वारा लापता लोगों की तलाश और परिजनों को 15 लाख रूपये की आर्थिक सहायता दिये जाने की मांग को लेकर अनिश्चित कालीन क्रमिक धरना दूसरे दिन शुक्रवार को भी जारी रहा। धरना स्थल से ही जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को पुनः ज्ञापन भेजा गया।
ज्ञात रहे कि विगत 28 दिसम्बर 2017 को खेती किसानी करके घर वापस लौट रहे जनपद के हर्रैया तहसील अर्न्तगत पारा, देवारा गंगवार और ऊंजी मुस्तहकम गांव के चार लोग छोटेलाल पुत्र जयराम ग्राम-ऊंजी मुस्तहकम, सुरजीत पुत्र भारत ग्राम देवरा गंगवार, मायाराम पुत्र ओरी ग्राम- पारा एवं बारा लखन्दर पुत्र चिरकुट घाघरा नदी में नाव पलटने के दौरान लापता हो गये। इन चार लोगों में से बारा लखन्दर पुत्र चिरकुट की लाश को ग्रामीणों ने ढूढ निकाला। ग्रामीणों के अनुसार प्रशासनिक स्तर पर उनके खोजबीन का कोई प्रभावशाली उपाय नहीं किया गया।
धरना स्थल पर सिद्धार्थ सिंह के साथ दयानाथ गिरी, सुरेन्द्र सिंह, परशुराम यादव, कन्हैया यादव, राजू सिंह, गौरव सिंह, चन्द्रहास पाल, राजेश सिंह, धर्मेन्द्र यादव, चन्द्रभान यादव, चिरकुट, अंजनी देवी, रसानई, यशोदादेवी, शिखा, सुधा, मालती, कमलदेवी, कलपावती, प्रभावती, जितना के साथ ही पारा और देव गंगवार के नागरिक एवं स्थानीय जन उपस्थित थे।


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