भारतीय पुनर्जागरण के पैगम्बर थे स्वामी विवेकानंद: डा. अनिल कुमार उपाध्याय
जे देवी महिला महाविद्यालय बभनान में स्वामी विवेकानंद की जयंती पर हुई गोष्ठी
मिथलेश शुक्ला (नीतू)
गोंडा / बभनान:समाज तभी आगे बढ़ सकता है जब समाज के लिए कुछ ना कुछ त्याग की भावना एवं समर्पण भाव से सभी को साथ लेकर समाज उत्थान के लिए कुछ ना कुछ करने की मनसा रखता है। दान पुण्य तो सभी करते है मगर समाजहित के लिए एवं सामाजिक सरोकार के साथ-साथ की सेवा कार्य को प्रमुखता से करना ही मानव जीवन का सबसे बड़ा पुनीत कार्य है। समाज के अन्तिम व्यक्ति तक विकास पहुंचे। उक्त बातें आचार्य नरेंद्र देव किसान स्नातकोत्तर महाविद्यालय बभनान के बीएड विभाग के डॉ अनिल कुमार उपाध्याय ने कही।
श्री उपाध्याय जे देवी महिला महाविद्यालय बभनान में आयोजित स्वामी विवेकानंद की जयंती में छात्राओं को सम्बोधित कर रहे थे। कार्यक्रम को गति देते हुए डा भूपेश ने कहा कि स्वामी विवेकानंद जी तार्किक एवं क्रातिंकारी विचारक थे। स्वामी जी के दर्शन से आज के युवा पीढ़ी को सीख लेकर जीवन में आत्मसात करना होगा। उन्होंने कहा कि स्वामी जी ने पूरे विश्व में अपने अल्प जीवन काल में ही भारत की सभ्यता का परिचय पूरे विश्व को देकर विश्व पताका फहराया था जिसकी गूंज आज भी पूरे विश्व में सुनायी पड़ती है।1883 में शिकागो में दिये गये संबोधन में श्री स्वामी जी ने उपस्थित लोगों का अभिवादन प्रिय भाइयों व बहनों कर किया था। उक्त संबोधन से ही पश्चिमी सभ्यता के लोग उनके कायल हो गये थे। युवाओं का आह्वान करते हुए महाविद्यालय मे प्राचार्य चंद्रमौली मणि तिवारी ने कहा कि आज के युवा शिक्षित होकर समाज में रचनात्मक कार्य करें। सफलता उनके कदम चुमेगी। क्योंकि भारत का निर्माण आप सब के कंधों पर है। डॉ किरन तिवारी , डॉ हरजीत कौर द्वारा छात्राओं को महापुरूषों के विचारों को आत्मसात करने के लिए प्रेरित किया। छात्रा रिचा मिश्रा द्वारा सरस्वती वदंना कर कार्यक्रम की शुरूआत की गयी। पूजा पांडे द्वारा स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया। सरस्वती पाठक, कविता सिंह द्वारा मंच का संचालन किया गया। इस मौके पर डॉ राजेश, पूनम शुक्ला, स्नेहा जायसवाल, बृज भूषण लाल श्रीवास्तव, संतोष पाठक, सीमा वर्मा, राज कुमार दूबे, अश्वनी मालवीय, मनीष द्विवेदी, शशिदर्शन तिवारी, आकाक्षा, कल्पना सिंह, मीनाक्षी जूली सिंह, अनुराधा चौधरी, रंजना मिश्रा सहित तमाम लोग मौजूद रहे।


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