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अमेठी में प्रियंका ने शुरु की थी राजनीति, अब कांग्रेस अध्यक्ष बन आ रहे राहुल



अलीम खान 
अमेठी (यूपी). नेहरु-गांधी परिवार का गढ़ कहे जानें वाली अमेठी में राजीव गांधी के बाद राजनीति की जो शुरुआत हुई उसकी आधार शिला 1999 में कांग्रेस की स्टार प्रचारक प्रियंका गांधी ने रखा था। पहले मां और फिर 2004 में यहां से भाई के राजनैतिक कैरियर की शुरुआत उन्होंंने ही की। पर कांग्रेस अध्यक्ष की कमान थामने के बाद सोमवार को राहुल गांधी का पुशतैनी गढ़ में पहला राजनैतिक सफर है।  
फ़िलवक्त बीजेपी के क़दम यहां हावी हो चले हैं इसलिये अब जल्द ही यहां पार पाना राहुल के लिये आसान नहीं है। वहीं 
अमेठी के लोगों को राहुल से काफी सारी  अपेक्षाएं हैं जिसे विपक्ष में होकर पूरा कर पाना उनके लिये आसान भी नहीं। यही कारण है के 1999 से लेकर 2009 तक टाप पर रही कांग्रेस का ग्राफ दिन-प्रतिदिन गिरता ही जा रहा।

प्रियंका की बदौलत टाप पर रहा पार्टी का प्रदर्शन
आपको बता दें जब पहली 1999 में अमेठी से सोनिया गांधी ने चुनाव लड़ा था तो कमान प्रियंका गांधी ने ही थामी थी,  और उन्हें 67.12% वोट मिले थे। इसके बाद 2004 में सोनिया ने बेटे राहुल के लिये अमेठी सीट छोड़कर रायबरेली से चुनाव लड़ा। दोनों ही सीटों की चुनावी कमान प्रियंका के हाथों में रही, अमेठी में राहुल को 66.18% तो रायबरेली में सोनिया को 58.75% वोट मिले। 
2009 में तो प्रियंका की कमान ने अमेठी से राहुल की जीत में चार चांद लगा दिया था, उन्हें 71.78% वोट मिले थे, जबकि रायबरेली से सोनिया को 72.23% वोट।  
 2014 मोदी लहर में भी प्रियंका का दादी की पारम्परिक सीट पर जलवा क़ायम रहा। रायबरेली में उनकी मां एक दिन भी कैम्पेन में नहीं आई, फिर भी 63.80% वोट उन्हें मिले। जबकि अमेठी में बीजेपी ने सारा तंत्र लगा रखा था, राजनैतिक परम्परा को तोड़ खुद पीएम पद के उम्मीदवार तक कैम्पेन को पहुंचे थे। बावजूद इसके ये प्रियंका ही की देन थी के कड़े मुकाबले के बाद भाई राहुल को उन्होंने 46.71% वोट कराये।

कांटों भरा है अमेठी के सफर का रास्ता
फ़िलवक्त राहुल गांधी अमेठी के सांसद हैं और सोमवार के पहले तक उन्होंंने अमेठी के जितने दौरे किये वो सांसद की हैसियत से किये। लेकिन सोमवार को वो अमेठी के सांसद होने के साथ-साथ कांग्रेस के अध्यक्ष की हैसियत से पहली बार अमेठी आ रहे। कांग्रेसियों में उनके आने पर खासा खुशी है, लेकिन अमेठी के लोगों ने अपने विकास को लेकर वैसी ही टकटकी लगा रखी है। 
सनद रहे कि जिस अमेठी में कभी राहुल गांधी को एक नज़र देखने के लिये लोग बेचैन होते थे आज उसी जगह उनके खिलाफ बगावती सुर सुनने को मिलते हैं। 
ताज़ा मामला हाल ही का है, उनके पार्टी अध्यक्ष बनने के ठीक दूसरे दिन अमेठी में सम्राट साइकिल की ज़मीन को लेकर उनके खिलाफ प्रदर्शन तक हुआ था। यही नहीं अक्टूबर 2017 में आख़री बार उनके अमेठी दौरे से लौटते ही दिग्गज कांग्रेसी नेता जंग बहादुर सिंह ने पार्टी को अलविदा कहकर बीजेपी ज्वाइन की थी। कांग्रेस से अलग हुए नेता ने राहुल पर तंज़ करते हुए कहा था के उनके अंदर नेतृत्व की क्षमता नहीं है। ऐसे में राहुल का अमेठी में सफर का रास्ता कांटों भरा है। 

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